शिकारगंज के गढ़वा में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण।
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शिकारगंज। गढ़वा गांव को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने समेत छह सूत्री मांगों को लेकर तीन माह से चल रहा धरना बृहस्पतिवार को क्रमिक भूख हड़ताल में तब्दील हो गया। पहले दिन छात्रा ममता चौहान व अर्चना चौहान भूख हड़ताल पर बैठीं। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई अपनी जमीन, घर व हक को बचाने की लड़ाई है।
गढ़वा में वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों की सुनवाई कर उस जमीन को कागज में उनके नाम करने तथा गढ़वा सहित ऐसे तमाम गांवों को राजस्व गांव का दर्जा देकर विकास योजनाओं से जनता को लाभान्वित करने समेेत अन्य मांगों को लेकर ग्रामीणों का 11 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना चल रहा था। इस पर तहसीलदार व उपजिलाधिकारी चकिया ने पहुंचकर समस्या को हल किए जाने का आश्वासन दिया था। मांगों के संबंध में कोई हल नहीं निकलने पर ग्रामीणों का धरना बृहस्पतिवार को क्रमिक भूख हड़ताल में तब्दील हो गया। पहले दिन 24 घंटे के लिए भूख हड़ताल पर बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ममता चौहान व इंटरमीडिएट की छात्रा अर्चना चौहान बैठीं। इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष कामरेड श्रवण मौर्य ने कहा कि यह लड़ाई अपनी जमीन, घर व हक की है। भाकपा(माले) के जिला सचिव कामरेड अनिल पासवान ने कहा कि अपने हक अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। इस दौरान इंकलाबी नौजवान सभा के जिला संयोजन समिति सदस्य रमेश चौहान, विदेशी राम, शिव नरायण बिंद, रामसुरत बियार रहे। अध्यक्षता किसान नेता शिव कुमार चौहान ने किया।
लोगों का समूह जहां रहता है कि उसे गांव कहते हैं। यहां के भूमि का रिकार्ड राजस्व विभाग के भूलेख कार्यालय के रिकार्ड में रहता है। गांव में ग्राम समाज की कुछ भूमि रहती है और यहां सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिलता है।
गढ़वा गांव पूरी तरह वन भूमि है। यहां दूसरे गांवों से आकर लोग बसे हैं। उनका आधार, मतदाता पहचान पत्र आदि उन गांवों में बना हुआ है। वनाधिकार कानून के तहत ही इसे राजस्व गांव का दर्जा दिया जा सकता है। राजस्व गांव संबंधित मांग के मामलों को उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। अजय कुमार मिश्रा
एसडीएम, चकिया