चकिया। ब्लॉक परिसर स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय का भवन जर्जर हो गया है। बरसात में भवन की छत टपक रही है। सोमवार को हुई बारिश ने इसकी बदहाली की तस्वीर को उजागर कर दिया। जहां एक ओर परिसर में एक फीट तक जलभराव है, छत टपकने से अभिलेख और दवाओं को बचाने में कर्मचारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
आजादी के समय निर्मित भवन पूरी तरह बदहाल हो चुका है। तहसील मुख्यालय स्थित यह पशु चिकित्सालय आसपास के दर्जनों गांवों के पशुपालकों के लिए एकमात्र सहारा है। पशु चिकित्सालय वर्षों से मूल भूत सुविधाओं से वंचित है। चिकित्सालय के मुख्य द्वार के पास का कमरा दरारों से भरा है। शौचालय व्यवस्था भी निष्क्रिय हो चुकी है, कर्मचारियों और पशुपालकों को भारी कठिनाई होती है। फार्मासिस्ट निजामुद्दीन वारसी और अजीत कुमार ने बताया कि बारिश में अभिलेखों और दवाओं को बचाने में मशक्कत करनी पड़ती है। दवा का स्टोर रूम और डॉक्टर के कार्यालय की छत भी टपकती है।
-
कोट
“चिकित्सालय भवन की मरम्मत, उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। परिसर में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश में जल भराव हो गया है।
डॉ. रविंद्र कुमार द्विवेदी, उपपशु चिकित्साधिकारी