चकिया /शिकारगंज। हर वर्ष गर्मी के मौसम में जंगल में आग लग जाती है। जंगल की आग को रोकने के लिए अब फायर ब्लोअर, फायर बॉल और काउंटर फायर की तकनीक भी काम आएगी। वनों में लगने वाली आग को रोकने के लिए काशी वन्य जीव प्रभाग की ओर से हर रेंज में फायर कंपाउंड की स्थापना कर वन कर्मियों के अतिरिक्त लोकल स्टाफ की तैनाती की जा चुकी है।
हर वर्ष काशी वन्य जीव प्रभाग के वनों में आग लगती है। वनों की आग से न केवल प्राकृतिक वन संपदा का विनाश होता है । बल्कि औषधीय प्रजातियों एवं वन्यजीवों के प्रवास का भी नुकसान होता है। वनों में लगने वाली आग को नियंत्रित करने या बुझाने के लिए पुरानी तकनीकों के तहत पतझड़ के कारण वन में गिरे पत्तों को अलग कर फायर लाइन बनाने, लोहे के पंजों तथा पेड़ों की हरी डालियों से आग को पीट-पीटकर बुझाने का सिस्टम अपनाया जाता था। वैज्ञानिक शोधों के बाद अब वनों की बड़ी आग को रोकने के लिए काउंटर फायर अर्थात जिस तरफ से हवा की दिशा का अनुमान करते हुए आग आगे बढ़ रही है। इसमें विपरीत दिशा से आग लगाई जाती है। ताकि दोनों आग आपसी संपर्क पर बुझ जाती है। वहीं फायर बाल तकनीक से आग के क्षेत्र में फायर बाल के जरिए आग बुझाने के लिए छोड़ा जाता है । वहीं फायर ब्लोअर के जरिए वन क्षेत्र में पत्तों के बीच हवा के प्रेशर से फायर लाइन बनाई जाती है, आगे आग फैलने से रोका जा सके।