चंदौली। कोरोना कॉल के दौरान मृत अभिभावकों के बच्चों को अब इधर-उधर भटकना नहीं होगा। ऐसे बच्चों को चिह्नित करके जिला प्रशासन उनके समुचित शिक्षा व्यवस्था तथा पोषण की जिम्मेदारी लेगा। अभी तक जिले में पांच ऐसे बच्चों को चिह्नित किया गया है। जबकि अन्य की तलाश के लिए निगरानी समितियों के माध्यम से सर्वे कराया जा रहा है।
सीएम बाल सेवा योजना के तहत कोविड से मृत अभिभावकों के बाद अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए प्रति माह चार चार हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। जबकि दस वर्ष के कम आयु के बच्चों को पोषण के लिए सरकारी बाल शिशु गृह में रखा जाएगा। शासन ने अवयस्क बच्चियों को रहने तथा शिक्षा ग्रहण कराने के लिए कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में रखने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। जबकि अनाथ कन्याओं की शादी के लिए 01.01 लाख रुपये का जिला प्रशासन उसके खाते में भुगतान करेगा। वहीं व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे अनाथ छात्रों को लैपटाप या टैबलेट दिया जाएगा। कोविड से मृत अभिभावकों के अनाथ बच्चों के सर्वे के दौरान जिले में पांच बालक चिह्नित हुए हैं।
कोविड से हुए अनाथ बच्चों को चिह्नित करने का कार्य चल रहा है। ब्लाकवार टीम का गठन किया गया है। वहीं ग्रामीण इलाकों में निगरानी समितियों के माध्यम से भी चिह्नित करने का कार्य हो रहा है। अभी पांच बच्चों को चिह्नित किया जा चुका है। किशन वर्मा, बाल कल्याण अधिकारी।