किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान न दिए जाने से नाराज किसानों ने सोमवार को
किसान विकास मंच के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और
प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अंत में डीएम सुरेंद्र विक्रम से
मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराया।
आरोप लगाया कि बर्बाद हुई फसल
की मुआवजा वितरण नीति पारदर्शी नहीं है। इस कारण तमाम ऐसे किसान हैं, जो
मुआवजा राशि से वंचित रह गए। किसी तहसील व ब्लाक मुख्यालय पर शासनादेश की
छायाप्रति चस्पा नहीं की गई, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है।
किसान
विकास मंच के अध्यक्ष जैराम सिंह ने डीएम को अवगत कराया कि जनपद में मौजूद
सिंचाई संसाधनों की स्थिति ठीक नहीं है। मरम्मत व रखरखाव के अभाव में
सिंचाई संसाधन दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इसके चलते खेती-किसानी
के वक्त किसानों को सिंचाई की समस्या से जूझना पड़ता है। तमाम प्रयास के
बाद भी स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
महामंत्री प्रेम नारायण सिंह
ने कहा कि नहरों व माइनरों पर बने रेग्यूलेटर, साइफन की मरम्मत की मांग दो
वर्षों से की रही है, लेकिन उन उपकरणों की मरम्मत नहीं हो सकी। किसानों ने
तहसील दिवस, जिला किसान दिवस, सिंचाई बंधु की बैठक आदि में भी यह मुद्दा
उठाया, लेकिन स्थिति आज भी यथावत बनी हुई है। कहा कि टेल के किसानों को
सिंचाई के लिए अक्सर पानी की समस्या से जूझना पड़ता है।
इसका तत्काल
निराकरण होना चाहिए। बताया कि असना, अरंगी, भदखरी, हड़ौरा, मसोई, घोड़सारी,
जिगिना, कवलपुरवा, भूसी, भोड़सर, धनाइतपुर आदि गांवों में सिंचाई की हालत
दयनीय है। उपाध्यक्ष दामोदर सिंह ने आरोप लगाया कि शहाबगंज सहकारी समिति के
सुपरवाइजर द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद को बेचा जाता है।
उन्होंने डीएम से मांग किया कि उक्त सुपरवाइजर को तत्काल वहां से हटाया
जाए।
चेताया कि यदि हम सभी की मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो किसान
व्यापक धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर रामअवध सिंह, वीरेंद्र सिंह,
इंद्रदेव सिंह यादव, श्यामलाल मौर्या, रामदुलार यादव आदि रहे।
रमेश पाण्डे, अशोक दुबे आदि उपस्थित रहे।