पीडीडीयू नगर। जिले में चार महीने में विभिन्न कारणों से पांच बुजुर्गाें ने जान दे दी। इनमें भी तीन की उम्र तो 70 वर्ष के भी पार है, इसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। बुजुर्गाें में आत्महत्या के आंकड़े डराने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि पारिवारिक कलह, कमजोर आर्थिक स्थिति के अलावा अकेलापन इस तरह की घटनाओं के पीछे प्रमुख वजह है।
बढ़ते पारिवारिक तनाव, उपेक्षा और कमजोर आर्थिक हालात के चलते बुजुर्ग आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। अब तक युवाओं और अधेड़ों के मामले ही सामने आते थे। पिछले चार महीने में बुजुर्गाें के आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसमें एक बुजुर्ग ने विषाक्त पदार्थ खाकर तो चार ने फंदे पर झूलकर जान दे दी। इसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। मनोचिकित्सकों की मानें तो बुजुर्ग नागरिक अवसाद (डिप्रेशन), चिंता, पुुरानी बीमारी, अकेलापन, सामाजिक अलगाव, आर्थिक और पारिवारिक विघटन के चलते जिंदगी से ऊब गए हैं।
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केस-1
18 सितंबर 2025 : सैयदराजा के फेसुड़ा गांव की रहने वाली 84 साल की सावित्री देवी ने रोशनदान पर साड़ी के फंदे से लटकर जान दे दींं। वह अपनी बहू और बच्चों के साथ घर पर रहती थीं।
केस 2
15 नवंबर 2025 : चकिया के तिलौरी गांव निवासी नगीना बेगम (70) ने पंखे के लटक कर जान दे दी। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुदकुशी की पुष्टि हुई। वह पति की मौत के बाद से वे बेटे और बहू से अकेले रहती थीं। वह अवसाद में चल रही थीं।
केस 3
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14 दिसंबर 2025 : अलीनगर में वाराणसी-कोलकाता एनएच पर 58 वर्षीय कारु भारती का शव संकेतक ग्रिल से लटका था। अलीनगर थाना प्रभारी के अनिल कुुमार पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई है। थाना प्रभारी ने बताया कि भाई से जानकारी हासिल करने पर पता चला कि आर्थिंक तंगी से जूझ रहे थे। काम नहीं मिलने के चलते परेशान थे।
केस-4
16 दिसंबर 2025 : सकलडीहा के चतुर्भुजपुर गांव में 58 वर्षीय स्वदेशी ने पारिवारिक कलह से परेशान होकर विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। वह मजदूरी करके अपना और परिवार का भरण पोषण करता था।
केस 5
16 दिसंबर 2025 : सैयदराजा के फेसुड़ा गांव के बाहर बगीचे में 80 वर्षीय नरेश राम का शव पेड़ की टहनियों से लटका मिला। वह 20 दिनों पहले घर से दवा लेने निकले थे, बाद लापता हो गये। वह मानसिक रूप से कमजोर थे और लंबे समय से उनका उपचार चल रहा था।
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इनसेट
जिले में कागजों में सिमट कर रह गई सवेरा योजना
वरिष्ठ नागरिकों की सेवा और सुरक्षा के लिए वर्ष 2019 में शासन के निर्देश पर पुुलिस की ओर से सवेरा योजना शुरू की गई थी। इसके तहत बुजुर्ग नागरिकों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ बीट पुलिस और पीआरवी कर्मी उनकी समस्याओं के निस्तारण और नियमित मुलाकात का प्रावधान किया था। सूत्रों के अनुसार जिले में यह योजना सिर्फ कागजों पर चल रही है लेकिन धरातल पर दम तोड़ चुकी है। किसी भी थाने में बीट पुलिसकर्मी या फिर पीआरवी पुलिसकर्मी की ओर से बुजुर्ग नागरिकों की सुधि नहीं ली जाती।
कोट
65 की उम्र पार होते ही जीवन में बीमारी और एकाकीपन अधिक परेशान करती है। वहीं परिवार में कलह भी बुजुर्गों में तनाव का कारण है। इसके बाद यह आत्मघात उठाते हैं।
- डॉ. अजय कुमार, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक, बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज, चंदौली