गोधना स्थित अधीक्षण अभियंता के कार्यालय परिसर में चल रहा बिजलीकर्मियों का धरना प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान बिजलीकर्मियों ने दोपहर दो से शाम के पांच बजे तक कार्य बहिष्कार किया। निजीकरण के विरोध में नारेबाजी की।
सभा में बिजलीकर्मियों ने ऊर्जा मंत्री के निजीकरण के पक्ष में दिए गए बयान पर रोष जताया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के विरोध में आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन को बुलाने का निर्णय लिया गया है।
महापंचायत में किसानों, आम उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों के राष्ट्रीय नेता सम्मिलित होंगे। कहा कि ऊर्जा मंत्री के निजीकरण के पक्ष में विगत बृहस्पतिवार को दिए गए बयान से बिजलीकर्मियों में आक्रोश है। कहा कि ऊर्जा मंत्री महापंचायत में आकर बिजलीकर्मियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं को निजीकरण का लाभ समझाएं तो बेहतर होगा।
ऊर्जा मंत्री ने ग्रेटर नोएडा और आगरा में बिजली के निजीकरण की प्रशंसा करते हुए कहा है कि आगरा और ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के बाद बहुत सुधार हुआ है। कहा कि आरडीएसएस योजना के तहत 44 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद जब प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ हो गई है, तब सरकारी पैसे से बिजली व्यवस्था सुधार कर निजी घरानों को लाभ देना किस सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।
सरकारी क्षेत्र में घाटे की परवाह न करते हुए नगरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस भीषण गर्मी में बिजलीकर्मी रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री इसका श्रेय तो ले रहे हैं किंतु वकालत निजी घरानों की कर रहे हैं।
उन्होंने चेताया कि निजीकरण का फैसला वापस होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। धरना व सभा में जिले के सभी एसडीओ, जेई व अन्य कर्मचारी रहे।