डीजल के दाम में लगातार हो रही बढोत्तरी के कारण ट्रैक्टर संचालकों ने खेतों की जुताई दरें बढ़ा दी हैं। इस कारण किसानों की समस्या बढ़ गई है। खेती की लागत बढ़ने से सीधा असर उनकी आमदनी को पड़ा है। डीजल का दाम बढ़ने से अब पांच सौ की जगह सात से साढ़े सात सौ रुपये प्रति हेक्टेयर जुताई हो गई है।
मई जून का महीना खेती-बाड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है इस दौरान खेतों की जुताई करके फसल की तैयारी की जाती है। हालत यह है कि लगातार बढ़ते डीजल का दामों के कारण ट्रैक्टर से खेतों की जोताई महंगी हो गई है। इस कारण किसानों का बजट बिगड़ गया है। पिछले वर्ष जहां प्रति हेक्टेयर 400 से 500 जोताई लगती थी। वहीं डीजल महंगा होने से 700 से 750 प्रति हेक्टेयर जोताई देनी पड़ रही है। किसान त्रिलोकी यादव कहते हैं कि दो वर्षों से निरंतर डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। खेती में लगातार घाटा हो रहा है जोताई तीन वर्षों में दोगुनी हो गई है ट्रैक्टर का किराया खेती-बाड़ी में इतना अधिक हो जाता है कि मेहनत मजदूरी का भी हिस्सा खेती-बाड़ी में नहीं निकल रहा है।
किसान संतोष सिंह कहते हैं कि ट्रैक्टर से खेतों की जोताई करना मजबूरी है। क्योंकि बैलों की जोड़ी का अब चलन खत्म हो गया है। डीजल महंगा होने के कारण खेती बाड़ी में ट्रैक्टर का किराया हर साल बढ़ता जा रहा है। सरकार अलग से किसानों को डीजल दें। किसान राधेश्याम पांडेय कहते हैं की सरकार तो खेतीबाड़ी से जुड़े ट्रैक्टरों के लिए डीजल सब्सिडी में आधार पर देना चाहिए व्यवसायिक वाहनों को सूची से हटाकर कृषि वाहनों को रखा जाए। किसान घुरहू सिंह पटेल कहते हैं कि किसानों की सस्ते दाम में डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सरकार को सोचना चाहिए।