चहनिया। कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे रामलीला के सातवें दिन रविवार की रात सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध की लीला हुई।
रावण ने अपने मामा मारीच को सोने का हिरण बनकर पंचवटी में सीता को लुभाने के लिए भेजा। सीता को हिरण बहुत सुंदर लगा और वह उसे पकड़ने के लिए राम से कहती है। राम हिरण को पकड़ने के लिए जाते हैं और मारीच को मार देते हैं।
राम के जाने के बाद, रावण एक साधु का वेश में आकर सीता से भिक्षा मांगता है। सीता उसे भिक्षा देने के लिए कुटिया से बाहर आती हैं और रावण उसे पुष्पक विमान में बैठाकर लंका की ओर ले जाता है।
जब रावण सीता को पुष्पक विमान में ले जा रहा था, तब जटायु नामक गिद्ध ने सीता की मदद करने के लिए रावण से युद्ध किया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, लेकिन रावण ने जटायु के पंख काट दिए और वह जमीन पर गिर गया। जब राम और लक्ष्मण सीता को खोजते हुए जा रहे थे, तब उन्हें घायल जटायु मिला। जटायु ने राम को बताया कि लंका का राजा रावण माता सीता का हरण कर ले गया।
रामलीला के दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु आदि थे।