पंचायत चुनाव के बाद जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। 28 अप्रैल के बाद लगातार मरने वालों का जो सिलसिला शुरू हुआ वह 16 मई तक जारी रहा। इसके बाद अचानक स्वास्थ्य विभाग ने अपनी विज्ञप्ति से मौत का आंकड़ा ही गायब कर दिया। वहीं कोविड पोर्टल पर जिले में मौत का आंकड़ा रोजाना दख रहा है। 16 मई को स्वास्थ्य विभाग ने मरने वालों की कुल संख्या 294 बताई थी। वहीं 21 मई को कोविड पोर्टल पर 320 लोगों के मरने की सूचना है। इससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
पंचायत चुनाव के बाद जिले के गांवों में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैला। सर्दी,जुकाम, बुखार से तीन सौ से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में भी एक से 15 मई तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 137 थी। पांच मई को एक दिन में 24 मरीजों की कोरोना से मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी यह बताने के लिए काफी थे कि जिले में संक्रमण काफी तेजी से फैला है। तमाम कोशिशों के बावजूद मौतों का सिलसिला न रुकने से स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी हो रही थी। इसी बीच 16 मई के बाद से स्वास्थ्य विभाग ने मौत का आंकड़ा गायब कर दिया। 21 मई तक कोविड पोर्टल पर जिले में कोरोना से 320 लोगों की मौत दर्ज थी जबकि स्वास्थ्य विभाग 294 के बाद कोई आंकड़ा नहीं दे पाया है।
सीएमओ डॉ. वीपी द्विवेदी से बात की गई तो उनका कहना था कि कोविड पोर्टल में अब तक कोरोना के जो आंकड़ा हैं उसमें 320 लोगों की मौत हुई है। उसमें से 294 घटा लीजिए। बचे 26 को छह दिनों में भाग दे दीजिए। लगभग चार लोगों के रोज मरने का औसत आएगा। इतने लोगों की मौत हुई होगी। सवाल किया गया कि स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों को क्यों नहीं दे रहा तो उन्होंने कहा कि कोविड पोर्टल पर जो मौत के आंकड़े हैं ये उन लोगों के हैं जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इनको प्रोमटिंग मरीज कहते हैं।
लगातार मौत की सूचना से लोगों में भय की स्थिति बनती है। इस आपदा में ज्यादा लोगों की मौत डर से भी हुई है। डर से व्यक्ति का प्रतिरोधक क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। रोग से लड़ने की उसकी जिजीविषा भी प्रभावित होती है। शायद लोगों में इस भय को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौत का आंकड़ा नहीं दिया जा रहा हो।- डॉ. धीरज मिश्रा, मनोचिकित्सक