चकिया/शिकारगंज। मानसून के सीजन में बारिश न होने से किसानों के लिए संकट के आसार बढ़ गए हैं। जिले के प्रमुख बांधों का पानी खत्म होने लगा है। चंद्रप्रभा, मूसाखांड, नौगढ़ और लतीफशाह बीयर में पिछले वर्ष के मुकाबले 85 प्रतिशत कम पानी है। वहीं, चंद्रप्रभा सिस्टम की नहरों के लिए सिर्फ आठ दिन का पानी बचा है। वहीं, कर्मनाशा नदी में 44 दिन का पानी है। इन बांधों के जरिये नहरों से किसानों को पानी नहीं मिलने और खेतों की नमी खत्म होने से करीब 15 हजार एकड़ में धान की रोपाई ठप। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
चंद्रप्रभा, मूसाखांड, नौगढ़ और लतीफशाह बांध से चंदौली के साथ बिहार में खेतों की सिंचाई होती है। बारिश का पानी इन बांधों में एकत्र होता है। इनसे संचालित नहरों से खेतों में पानी पहुंचता है और सिंचाई होती है। बंधी प्रखंड के अधिकारियों की मानें तो जुलाई में बांधों के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में अभी तक मात्र 35 एमएम बारिश हुई है। इससे बांधेां में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं हो पाया है। इससे बांधों पर आधारित रों में पानी छोड़ने में दिक्कत हो रही है।
स्थिति यह है कि जिले में अभी तक मात्र 35 प्रतिशत धान की रोपाई हो सकी है। यदि पानी नहीं बरसा तो खेती मुश्किल होगी। चंद्रप्रभा सिस्टम से जुड़े करीब 15 हजार एकड़ क्षेत्रफल के खेतों में धान की रोपाई पानी के अभाव में रुकी हुई है। किसानों के अनुसार यह सिस्टम करीब 20 दिन पीछे चल रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
क्षेत्रीय किसान शेषनाथ पांडेय, जुबेर अहमद, अमरनाथ सिंह पटेल, भानु प्रताप सिंह, देशराज सिंह पटेल, वरुण दुबे, सोहन मौर्या, ओमप्रकाश, ओंकार सिंह और संजय पटेल ने बताया कि समय से नहरों में पानी नहीं मिलने से धान की खेती पिछड़ रही है। किसानों को मजबूरी में महंगे डीजल और बिजली के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है।
बांध वर्तमान में पानी की स्थिति इतना पानी होना चाहिए
चंद्रप्रभा बांध 742 फीट 772 फीट
लतीफशाह बीयर 313.3 फीट 350 फीट
मूसाखाड़ बांध 286.1 फीट 354 फीट
नौगढ़ 885.01 फीट 895 फीट
भैसौड़ा 902.06 फीट 908 फीट
कोट-
कर्मनाशा सिस्टम की नहरों के संचालन के लिए बांधों में 44 दिन का पानी उपलब्ध है, जबकि चंद्रप्रभा सिस्टम की नहरों के लिए करीब 8 दिन का पानी मौजूद है। विभाग द्वारा उपलब्ध पानी के अनुसार नहरों का संचालन कराया जा रहा है। - हरेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग