नगर पालिका जनप्रतिनिधि बोर्ड की आहूत बैठक में मंगलवार को सभासदों ने खूब
हंगामा किया। हंगामे की वजह से बैठक की कार्रवाई पूरी नहीं हुई। नगर पालिका
के सोलह सभासद ईओ पर अनियमित तरीके से कार्य का प्रस्ताव लाने का आरोप
लगाते हुए धरने पर बैठ गए।
बाद में एसडीएम और क्षेत्रीय विधायक के समझाने पर धरना खत्म हो गया।
पूर्व
निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह 11 बजे नगर पालिका बोर्ड की बैठक शुरू
हुई। सभासदों का आरोप है कि बैठक में 25 करोड़ रुपये के कार्य का प्रस्ताव
रखा गया, जबकि वर्तमान में नगर पालिका के पास करीब नौ करोड़ रुपये ही शेष
बचे हैं। कैलाशपुरी के सभासद आलोक सिंह ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।
इनका
साथ देते हुए अन्य सभासद भी ईओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कहने
लगे। इस पर नगर पालिका अध्यक्ष ने आधे घंटे के लिए बोर्ड की बैठक को स्थगित
कर दिया।
आधा घंटा बाद फिर से बैठक की कार्रवाई शुरू हुई, तो सभासदों ने
प्रस्ताव संख्या दो, तीन, चार, पांच, छह, 27 व 28 एवं पूरक एजेंडा के
प्रस्ताव संख्या 1,2 और 3 के संदर्भ में अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष से
वित्तीय अनियमितता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। इस पर जवाब दिए बिना ही बोर्ड
की बैठक को स्थगित कर दिया गया।
इससे सभासद नाराज हो गए और सभागार के बाहर
आकर धरने पर बैठ गए।
सभासदों ने आरोप लगाया कि निर्माण विभाग के
ठेकेदारों ने कार्य पूर्ण करा लिया है, लेकिन बोर्ड के पारित प्रस्ताव के
अनुसार सभासद की संस्तुति के बाद भी ठेकेदारों को कार्य का भुगतान नहीं
किया जा रहा है।
इससे विकास कार्य बाधित है। कहा कि सभासदों की संस्तुति के
बगैर ही कार्य प्रस्ताव लाया गया है। इस पर बिना कोई जवाब दिए अध्यक्ष और
अधिशासी अधिकारी बैठक से उठ कर चले गए।
सूचना पाकर शाम पांच बजे एसडीएम सदर
गिरीश कुमार और क्षेत्रीय विधायक बब्बन सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और
सभासदों को समझा बुझाकर धरना खत्म कराया।
धरना देने वालों में आलोक सिंह,
सरस्वती देवी, वकार जाहिद बल्ला, समीउल्लाह, पारसनाथ, भानु तिवारी, सुनील
विश्वकर्मा, माधुरी देवी, शांति, मुर्शिदा बेगम, दीपमाला, लक्ष्मीना, मालती
देवी, शैलेन्द्र कुमार गुप्ता, महेन्द्र कुमार पटेल, रामजी गुप्ता आदि
रहे।