कंदवा। क्षेत्र के कम्हरिया गांव में वर्षों पूर्व बना राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। दीवार में दरारें, उसमें उगे पीपल के पेड़, टूटी छत एवं टूटा फर्श अस्पताल की बदहाली को बयां कर रहा है। जर्जर हो चुका अस्पताल अपने कायाकल्प के इंतजार में है।
जनता को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा के लिए 28 नवंबर 1970 को कम्हरिया गांव में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कराया गया था। इसमें चिकित्सकों, फार्मासिस्ट व वार्ड व्याय आदि के रहने के लिए भी व्यवस्था बनाई गई थी। शुरू में यह अस्पताल सुचारू ढंग से चला तथा क्षेत्र के कंदवा, कम्हरिया, बहेरा, पिपरदहा, सिसौरा, बकौड़ी, असना, चखनिया,पई, बरिला, बरिली आदि गांवों के लोगों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा मिलती रही। बाद में स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा के चलते आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति बद से बदतर होती चली गई और यहां कोई मरम्मत कार्य भी नहीं हो पाया। अस्पताल के जीर्णोद्धार के लिए गांव और क्षेत्र के लोगों ने कई बार आवाज उठायी लेकिन इस अस्पताल के जीर्णोद्धार के प्रति न तो स्वास्थ्य विभाग और ना ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का ध्यान ही इस ओर गया। जिससे यह अस्पताल अंतिम सांसे ले रहा है। ग्राम प्रधान अंजनी सिंह, डॉ संजय सिंह, डॉ मनोज सिंह चंदेल, विजय शंकर सिंह, डॉ जयकुमार सिंह, डॉ. मनोज सिंह आदि लोगों ने अस्पताल के जीर्णोद्धार की मांग की है।