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Chandauli News: सोशल मीडिया पर अनजान लिंक को क्लिक करना, मतलब खतरा

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पीडीडीयू नगर। डीएसपी क्राइम और साइबर सेल आशुतोष ने कहा कि सूचना क्रांति के चलते दुनिया मुट्ठी में समा चुकी है। सोशल साइट और नेट पर सर्चिंग के दौरान सावधानी की जरूरत है। अनजान लिंक को क्लिक करना जोखिम भरा हो सकता है। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को पीडीडीयू नगर के एसजी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि अपराध का तरीका बदल रहा है। उसके हिसाब से हमें भी बदलना होगा। युवा मोबाइल फोन में खोए रहते हैं। मनोरंजन का सबसे आसान साधन रील्स देखना हो गया है। हमें मनोरंजन से ज्यादा जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। आप पढ़ाई पर ध्यान दें। स्मार्टफोन का प्रयोग कम करें। कोई अनजान व्यक्ति वीडियो काॅल करता है तो सेल्फी कैमरे को ढक कर कॉल रिसीव करें। कई गिरोह ऐसे हैं जो सोशल मीडिया पर लालच देकर ठगते हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है। किसी को यूपीआई से भुगतान कर रहे हैं तो क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करें। भरसक किसी को यूपीआई नंबर न दें।
उन्होंने युवाओं से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। कहा- कोरोना काल में हम सावधानी से रहते थे। उससे अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं लेकिन हम लापरवाह हैं। युवा दुनिया बदलने वाले होते हैं। हम अपने स्तर से सुधार करें तो समाज भी बदलेगा।
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उन्होंने कहा कि महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए तमाम कानून हैं। बेटियों को डरने की जरूरत नहीं है। कोई छींटाकशी करता है तो उसका विरोध करें और पुलिस को सूचित करें। डीएसपी ने सवाल पूछने वाले छात्र-छात्राओं को किताबें देकर पुरस्कृत किया। स्वागत प्रधानाचार्य प्रशांत कुमार तिवारी ने किया। इस अवसर पर टीएसआई लाल बहादुर पांडेय, आनंद कुमार और सौरभ ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।


इनसेट-
छात्र-छात्राओं के सवाल और डीएसपी के जवाब
समीर तिवारी: जाम की समस्या को दूर करने के लिए हम क्या करें? जवाब : यातायात नियमों का पालन करें। शहर या किसी मेले में जाते हैं तो परिजनों से कहें कि वे अपने वाहन पार्किंग में ही खड़ा करें। जाम लगने पर पुलिस को सूचित करें।
रुचि यादव: क्या हेलमेट पहनना जरूरी है? जवाब: हेलमेट पहनने से आपकी सुरक्षा रहती है। दुर्घटना में सबसे अधिक जान हेलमेट नहीं पहनने या सीट बेल्ट न लगाने वालों की जाती है।
पारूल यादव : कोई अनजान व्यक्ति फोन करके परेशान करता है तो उसका पता कैसे लगाएं?
जवाब: हम कहीं अपना नंबर देते हैं तो उसका गलत इस्तेमाल भी होता है। अगर ऐसा है तो पुलिस से शिकायत करें। उस नंबर का आईपी एड्रेस निकालकर उसका पता लगाया जा सकता है।


इरफान: साइबर क्राइम से बचने के क्या उपाय हैं?
जवाब: सोशल साइट पर अनजान लोगों से बात न करें। ई-कामर्स साइट से सामान मंगाते हैं तो उसका रैपर इधर-उधर न फेंके। उसमें मोबाइल नंबर और दूसरे विवरण होते हैं।


वैष्णवी : यदि हमारे सामने कुछ गलत हो रहा है तो क्या करें?
जवाब: यदि कहीं गलत हो रहा है तो 112 नंबर पर काॅल कर तुरंत सूचित करें। दुर्घटना में कोई जख्मी हैं तो पहले अस्पताल पहुंचाएं और जरूरत पर पुलिस को फोन करें।

कशिश: कोई छींटाकशी करे तो परिवार वाले हमें ही टोकते हैं ?
जवाब: आपके साथ कोई छेड़खानी करता है तो इसकी सूचना अध्यापकों और परिवार वालों को दें। महिला हेल्पलाइन पर भी सूचना दे सकते हैं। आपका नाम गोपनीय रहेगा।


कनिष्का: ई रिक्शा वाले बेतरतीब क्यों चलते हैं?
जवाब: ई-रिक्शा पर्यावरण के अनुकूल वाहन हैं। जल्द ही उनके लिए भी कानून बनाए जाएंगे। उन्हें नियंत्रित चलने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।

चारु श्रीवास्तव: दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद पुलिस के डर से नहीं करते हैं?
जवाब: यदि आपने गलत नहीं किया है तो पुलिस आपके खिलाफ कुछ नहीं करेगी। दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद हमरा कर्तव्य है। ऐसे लोगों पुरस्कृत किया जा रहा है।
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पलक शर्मा: हमारे साथ कुछ भी गलत होने पर परिवार वाले हमें ही दोषी ठहराते हैं?
जवाब: समाज बदल रहा है। महिला हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। अपने आत्मसम्मान के लिए आपको ही आवाज उठानी पड़ेगी। आप मजबूत होंगे तो लोग आपका साथ देंगे।


कृष्णा राय : वाहन टकराने पर चालक लड़ाई करें तो हम क्या करें?
जवाब: दुर्घटना के बाद चालकों की लड़ाई से जाम लग जाता है। ऐसे में आप खुद को दूर रखें और 112 नंबर पर काॅल करें। बाकी काम पुलिस करेगी।
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