जिन घरों में व्रत हो रहा है, उन घरों में दीपावली के बाद से प्याज लहसून आदि का प्रयोग बंद कर दिया दिया गया और शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जा रहा था। सोवार को भोजन तैयार करने के बाद व्रतियों ने भगवान सूर्य की प्रार्थना करने और जलदान करने के बाद भोजन ग्रहण किया। इसके बाद पूरे परिवार के लोगों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया। इसके साथ ही घरों में अर्घ्य देने की तैयारी शुरू हो गई।
व्रतियों ने अपने हाथों से भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए पकवान तैयार करने के लिए गेहूं धोया और सूखाया। वहीं घरों में छठ व्रत के गीत शुरू हो गए। दूसरी तरफ परिवार के सदस्य घर के नजदीकी सरोवर तटों पर पहुंच कर घाट की साफ सफाई कर वहां अपना नाम लिखा और घाट छेंका।
यहां बुधवार की शाम और गुरुवार की सुबह घाटों पर कलश स्थापित करने के लिए मिट्टी की बेदी बनाई। मंगलवार की सुबह से व्रती निराजल व्रत करेंगे और शाम के वक्त घाटोंपर दीप दान किया जाएगा। इस दौरान घाट पूजन भी होगा। इसके बाद घरों में पहुंच कर व्रती दूध, चावल और गुड़ की बखीर तैयार कर भोग लगाएंगे। इसके बाद 36 घंटे का निराजल व्रत की शुरूआत होगी।