रोज 24 किमी दौड़कर ऑफिस जाते हैं दधिबल चौहान
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एथलीट दबिधल सिंह चौहान को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) बीएचयू में नौकरी के लिए ऑफर मिला है। अमर उजाला में मंगलवार को प्रकाशित खबर को पढ़कर आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेमनारायण सिंह ने दधिबल सिंह से फोन पर बात की और उन्हें संस्थान में नौकरी की पेशकस की। इससे दधिबल के खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
अभावों से जूझ रहे एथलीट की आंखों में आंसू थे और जुबां से बस यही शब्द निकले- शायद भगवान ने मेरी पुकार सुन ली। चंदौली के शहाबगंज ब्लॉक के केराडीह गांव निवासी 58 वर्षीय एथलीट दधिबल सिंह चौहान सेना में एथलेटिक कोच और हवलदार के पद से सेवानिवृत हुए थे। वह रामनगर के भीटी गांव में पत्नी कनक देवी और दो पुत्रों के साथ रहते हैं।
महाराष्ट्र में आयोजित नेशनल वेटरन एंड गेम्स चैंपियनशिप में दधिबल को गोल्ड मेडल पहनाते अतिथि।
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बड़ा पुत्र यदुवंश सिंह चौहान मानसिक रूप से बीमार है, जिसके इलाज में दधिबल की पेंशन के पूरे पैसे खर्च हो जाते हैं। पैसे के अभाव में वह गार्ड की नौकरी करते हैं और रामनगर से वाराणसी के महमूरगंज काम करने 24 किमी रोज दौड़कर जाते-आते हैं। सेवानिवृत होने के बाद 15 वर्षों में उन्होंने विश्व चैपिंयनशिप से लेकर कई मास्टर गेम में 22 मेडल जीते हैं।
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नमें 13 गोल्ड, तीन सिल्वर और छह ब्रांच मेडल हैं। पैसे न होने की वजह से वह कई प्रतियोगिताओं में भाग लेने से वंचित रह गए। मदद की गुहार लगाई पर किसी ने नहीं सुनी।
महाराष्ट्र में आयोजित नेशनल वेटरन एंड गेम्स चैंपियनशिप में दधिबल द्वारा जीता गया मेडल।
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अमर उजाला ने 10 अक्टूबर के अंक में ''''''''उम्र 58़़....रोज 24 किमी दौड़कर ऑफिस जाते हैं दधिबल चौहान'''''''' शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसे पढ़कर बीएचयू स्थित अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेमनारायण सिंह ने दधिबल सिंह को फोन कर संस्थान में नौकरी का ऑफर दिया। इससे दधिबल की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि लगता है अब बेटे के इलाज के साथ बड़े गेम में प्रतिभाग करने का सपना पूरा हो जाएगा। बताया कि वह जल्द ही नौकरी ज्वाइन करेंगे।