पीडीडीयू नगर। बिजली विभाग में हुए लगभग 4122 करोड़ के जीपीएफ/सीपीएफ घोटाले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जनपद के अवर अभियंताओं ने बुधवार को एडीएम न्यायिक मनोज सिन्हा को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके पूर्व अवर अभियंताओं ने विद्युत वितरण खंड पर सभा आयोजित कर प्रदेश सरकार से बोर्ड आफ ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ ही निवेश किए गए बिजली कर्मियों के 4122 करोड़ रुपये की वापसी का जिम्मा लेते हुए राजाज्ञा जारी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आर्थिक भ्रष्टाचार के कारण बिजली कर्मियों की गाढ़ी कमाई के बंदरबांट से उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। कर्मियों के समक्ष बच्चों की शादी व उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने का संकट खड़ा हो गया है। बगैर किसी ठोस नीति के बिजली कर्मचारियों के जीपीएफ/ सीपीएफ के मद में की गई कटौती की धनराशि का दीवालिया हो चुके दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश उच्च स्तर पर गैर जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता उजागर करता है। यह निश्चित रुप से आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। प्रबंधन के गलत नीतियों पर सवाल उठाते हुए जूनियर इंजीनियर संगठन के सदस्यों ने कहा कि बोर्ड आफ ट्रस्ट के गठन के समय तय था कि ट्रस्ट में सरकार, प्रबंधन व मजदूरों का प्रतिनिधित्व होगा जिसकी मासिक समीक्षा की जाएगी। बावजूद इसके प्रबंधकीय कार्य प्रणाली और गलत नीति निर्धारण के चलते गत 19 वर्षों के लंबे अंतराल में केवल एक समीक्षा बैठक की गई जिसका परिणाम आर्थिक भ्रष्टाचार के रूप में उजागर हो चुका है। उन्होंने प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच न कराए जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। इस मौके पर इंजीनियर एके पांडेय, सतीश यादव, विकास गुप्ता, कमर फारूख, जयकार पटेल, मनोज पटेल, घनश्याम, रामजी सिंह, प्रमोद शर्मा, संजय कुशवाहा, कृष्णालाल यादव, प्रेमचंद, नियाज खान आदि मौजूद थे।