चहनिया। कैलावर स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। देश के कोने-कोने से महायज्ञ में शामिल होने साधु-संतों के अलावा भक्तों के आने का क्रम अभी भी जारी है। महायज्ञ के दूसरे दिन गुरुवार को आचार्य विजय राघव पांडेय के नेतृत्व में 151 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार कर पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। यज्ञ आरंभ होने से पूर्व संत-महात्माओं संग श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। परिक्रमा का क्रम देर रात तक चलता रहा। इस दौरान जीयर स्वामी ने कहा कि लगन और मेहनत से ही सफलता मिलती है।
जीयर स्वामी ने कहा कि तपस्या से ही जीवन संवरता है। आदि काल से संत, महात्मा तपस्या करते चले आए हैं। वे इतने महान हुए की उनके उपदेश आज भी लोगों को शिक्षा देते हैं। तपस्या करने वाला मनुष्य ही जीवन में सफल होता है। कहा कि जो छात्र लगन व मेहनत से अध्ययन करते हुए सामाजिक कुरीतियों से दूर रहते हैं, वही भविष्य में सफल होता है। कहा कि भोग से व्यक्ति का जीवन विकृत हो जाता है। शास्त्रों में भोग के छह उदाहरण मिलते हैं। किसी का स्मरण, कीर्तन, हास-परिहास, दुर्भावना से किसी को देखना व वासना यह सब भोग की श्रेणी में आता है। अगर आपको तपस्या के मार्ग पर चलना है तो वाणी, आचरण, व्यवहार को संयमित रखना चाहिए। यह सब तपस्या के समान है जो व्यक्ति में गुणों का सृजन करते हैं। शास्त्रों में चर्चा की गई है कि आने वाले समय में धर्म व कर्म तो होगा पर लोगों में शर्म नहीं रहेगी। भोग करने वालों को ही रोग का सामना करना पड़ता है। इन सबसे बचने का सुगम मार्ग यह है कि पूरे जगत में परमात्मा की सत्ता मानते हुए अपने कर्मों को परमात्मा को सौंप दें। इससे दुर्गुण स्वयं समाप्त होने लगेंगे।
आयोजनकर्ता स्वामी अयोध्यानाथ ने बताया कि यज्ञ में शामिल होने आए संत-महात्माओं व श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दर्जनों बड़े-बड़े पंडाल बनाए गए हैं। वहीं प्रसाद बनाने के लिए देश के कोने-कोने से चर्चित कारीगरों को बुलाया गए हैं। संत जीयर स्वामी सभी कार्यों का स्वयं मुआयना कर रहे हैं।