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महंगाई कम करने की हो उपाय

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पीडीडीयू नगर। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आम बजट पेश करेंगी। बजट को लेकर समाज के सभी वर्ग के लोगों में भारी उत्सुकता है। सभी को उम्मीद है कि बजट का पिटारा खुलेगा तो उसमें महंगाई को कम करने की कोई न कोई व्यवस्था होगी। क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय बजट पर विभिन्न वर्ग के लोगों ने अपनी राय प्रकट की।
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खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से बजट गड़बड़ाने लगा है। दाल, तेल, मसाले सहित सब्जियों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। वित्त मंत्री को इनके बढ़ रहे मूल्यों पर नियंत्रण लगाने वाला बजट पेश करना चाहिए। साथ ही बजट रसोई गैस के मूल्यों पर अंकुश लगाने वाला होना चाहिए। कोमल गुप्ता, गृहिणी।
केंद्र सरकार के बजट में देश भर अधिवक्ताओं की मूल भूत सुविधाओं व उनके वेतन के लिए प्रावधान करना चाहिए। साथ ही गरीब तबके के लोगों को मुफ्त न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कार्य करने चाहिए। संतोष पाठक, अधिवक्ता।
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वित्त मंत्री को लगातार बढ़ती जा रही मेडिकल के पढ़ाई की फीस पर नियंत्रण लगाने के कदम उठाने चाहिए। साथ ही वर्तमान मेडिकल सिस्टम से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और आयुष्मान भारत योजना में एकल चिकित्सकों को वरीयता देनी चाहिए। डा. प्रदीप गुप्ता, चिकित्सक।
देश में कार्पोरेट सेक्टर तो तेजी से बढ़ रहा है पर मंझले व कुटीर उद्योगों की हालत दयनीय होती जा रही है। सरकार को मंझले व कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के उपाय करने चाहिए। साथ ही बैकों पर नकेल कसते हुए उन्हें छोटे उद्यमियों को लोन देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आरके चौधरी, उद्यमी।
बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए करना चाहिए ताकि भारत विश्वगुरु बन सके। अच्छी शिक्षा से ही देश का भविष्य सुधरेगा। बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए वृहद योजना बननी चाहिए। अभी तक किसी भी सरकार ने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता में नहीं रखा है। सुरेश कुमार, शिक्षक।
बजट में टैक्स की दर कम कर जीएसटी फार्म को सरल किया जाए जिससे छोटे दुकानदार भी सुगमता से व्यापार कर सकें। टैक्स के बोझ तले दबकर परेशान हैं। व्यापार नीति जटिलता के कारण यह छोटे व मंझोले तबके के दुकानदारों की समझ में नहीं आ रही है। जटिलताओं को समझने के लिए अतिरिक्त धन खर्च कर सेलटेक्स अधिवक्ता व सीए का सहारा लेना पड़ता है। राजकुमार जायसवाल, व्यापारी।
सरकार को टैक्स स्लैब 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख करना चाहिए। रेलवे के निजीकरण को रोकने के ठोस उपाय करने चाहिए। साथ ही कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की सुविधा तत्काल बहाल करनी चाहिए। शिवकुमार सिंह, रेलकर्मी।
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