इसी संवाद को बढ़ाने के लिए यूनेस्को ने वर्ष 1961 में निर्णय लिया था कि 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाएगा। जिले में भी रंगमंच काफी समृद्ध रहा है, लेकिन प्रशासनिक तौर पर आज तक कुछ नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि यहां के कलाकारों ने आवाज नहीं उठाई है। जिले बनने से पहले से यहां प्रेक्षागृह के निर्माण की मांग हो रही है।
वरिष्ठ रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि कलाकारों के लिए प्रेक्षागृह बनाया जाना चाहिए। इससे यहां के कलाकार आगे बढ़ सकते हैं। उचित मंच न मिलने से कलाकार भटक रहे हैं। रंगकर्मी देवेश कुमार ने कहा कि मुगलसराय में 1960 में इंडियन इंस्टीट्यूट स्थित तत्कालीन रेलवे सिनेमा घर में प्रथम नाटक का मंचन किया गया था।
उसके बाद कुछ दिन तक यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन बाद में वह भी बंद हो गया। अंजू चौहान का कहना है कि विभिन्न संगठन रंगमंच के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन प्रस्तुति के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि नगर में एक प्रेक्षागृह बनाया जाना चाहिए। ताकि कलाकारों को मंच मिल सके।