चंदौली। एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर हर महीने ढाई हजार से अधिक शिकायतें आ रही हैं लेकिन निस्तारण सिर्फ कागजों पर हो रहा है। हर माह 500 से 700 मामले लंबित रह जाते हैं। यही वजह रही जिले को आजतक आईजीआरएस रैंकिंग में पहला स्थान नहीं मिल पाया है। आईजीआरएस पोर्टल पर हर महीने सबसे ज्यादा राजस्व, ग्राम पंचायत, समाज कल्याण और पुलिस विभाग से संबंधित तीन हजार के करीब शिकायतें आती हैं। निस्तारण भी लगभग ऑनलाइन ही कर दिया जाता है जबकि समस्या ज्यो का त्यों रह जाती है। बीते अक्तूबर में तीन हजार 506 मामलों में पीडब्ल्यूडी के 35 मामलों का फीडबैक लिया गया जिसमें से 31 मामले में असंतुष्ट फीडबैक मिले। विद्युत निगम के 33 मामलों का फीडबैक लिए जाने पर 20 मामले में असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त हुआ। डीपीआरओ के 13 में से 10 मामले में असंतुष्ट फीडबैक मिला। धानापुर के छह मामले डिफॉल्टर थे। सिंचाई विभाग के पांच डिफॉल्टर, ईओ मुगलसराय के चार और मनरेगा में तीन मामले डिफाल्टर मिले थे। नवंबर में भी 2599 मामले दर्ज हो चुके है। इनके निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है।
वर्जन
आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों का समाधान संबंधित विभाग को प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा जाता है। जिन विभागों के सबसे अधिक मामले आते हैं उनको मौके पर जाकर समाधान के लिए अधिकारियों को कहा है।
-सरेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी