जिले में 18 सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें पौने दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। केंद्रों पर बच्चों को खिलौने और पढ़ाई के लिए सामान उपलब्ध होता है। बच्चों की देखरेख और उनके ज्ञानवर्धन की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पर होती हैं। विडंबना यह है कि इनमें अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र या तो बंद रहते हैं या जर्जर हैं। जिससे केंद्र पर सन्नाटा रहता है।
जिले में अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्राथमिक विद्यालयों के भवनों में होता है। वहीं खुद के भवन में चलने वाले केंद्रों की हालत भी दयनीय है। ऐसे में बच्चे जर्जर केंद्रों में बैठने को विवश तो हैं, बच्चों को शुद्ध पेयजल के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे केंद्रों की हालत सुधारने की सुधि शासन ने ली तो है पर धरातल पर इसका असर नहीं दिख रहा है। फिलहाल एमएलसी चुनाव के लिए लगी आचार संहिता के चलते योजना पर रोक है। मतदान के बाद ग्राम पंचायतों को अलग से बजट भेजा जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायतों को जीपीडीपी के तहत डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) देनी होगी जिसके आधार पर पैसा निर्गत होगा। पेयजल के लिए बच्चों के अनुकूल (चाइल्ड फ्रेंडली) हैंडपंप भी लगाए जाएंगे। देखना यह होगा कि इन कार्यों को कब तक आरंभ किया जाता है।
प्राइवेट सहायिका के भरोसे चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
क्षेत्र के डेवढिल गांव में दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर कार्यकत्री ने प्राइवेट सहायिका को मात्र ढाई सौ रुपये महीने के वेतन पर बच्चों की जिम्मेदारी दे रखी है जो बच्चों की देखरेख में लगी रहती है। केंद्र प्राय: बंद ही रहता है। इससे आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चे इधर-उधर घूमते रहते हैं। कुपोषण हटाने से लेकर अन्य सुविधाएं भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही इन बच्चों तक पहुंचनी है। बावजूद इसके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
केंद्र के खिड़की-दरवाजे ले गए चोर
सकलडीहा विकासखंड के जलालपुर गांव में कई दशक पूर्व बना आंगनबाड़ी केंद्र 10 वर्षों से जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। केंद्र के खिड़की-दरवाजे चोर उठा ले गए हैं। वहीं परिसर में ग्रामीण कब्जा कर उपले पाथ रहे हैं। यह आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ कागजों पर चल रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर जनसुनवाई पोर्टल तक ग्रामीण कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
तीन माह से नहीं मिल रहा धात्री महिलाओं को राशन
क्षेत्र में महुंजी सहित कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल हैं। चारी और महुंजी गांव की कई गर्भवती व धात्री महिलाओं व उनके परिजनों का आरोप है कि पिछले तीन माह से उन्हें दलिया, रिफाइंड और दाल नहीं मिल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की इस लापरवाही से महिलाओं में काफी असंतोष है। वहीं नौनिहालों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
छतविहीन है अशोक नगर का आंगनबाड़ी केंद्र
धानापुर विकासखंड के अशोक नगर ग्राम सभा में 2010 में बना आंगनबाड़ी भवन छत विहिन है। केंद्र को सिर्फ प्लास्टर करके छोड़ दिया गया है। पंचायत भवनों के चल रहे कायाकल्प के समय भी इस आंगनबाड़ी केंद्र की छत नही ढ़लवाई गई। ग्राम प्रधान रविकांत यादव ने बताया कि कम धन मिलने के कारण छत नहीं बनवाई जा सकी है। वहीं रैपुरा ग्राम सभा के आंगनबाड़ी केंद्र पर शौचालय नहीं होने से कार्यकर्ताओं और बच्चों को भटकना पड़ता है। संवाद
बदहाल आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा में शीघ्र सुधार किया जाएगा। इसके लिए डीपीआर बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शीघ्र ही केंद्रों की दशा सुधारने का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
- जया त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।