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मौसम परिवर्तन के बाद हुई बारिश से फसलों को संजीवनी

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जनपद में बृहस्पतिवार को मौसम का ऐसा मिजाज बदला की ठंड में एक बार फिर इजाफा हो गया। कुछ किसानों की चिंताएं बढ़ी लेकिन किसानों को फायदा होने की भी उम्मीद है। गेहूं की फसल को जहां बारिश संजीवनी बन गई। वहीं दलहनी व तिलहनी की फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। मौसम का असर शुक्रवार को भी देखने को मिला, बारिश तो नहीं हुई फिर भी मौसम ठंड रहा और मौसम बादल छाए रहे।
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जिले में बृहस्पतिवार शाम से ही गरज चमक के साथ मौसम का मिजाज बिगड़ा और देर शाम कई हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। सर्द हवा की गति तेज होने से ठंड में इजाफा भी हुआ, लेकिन शुक्रवार की सुबह ठंड का असर कम नहीं रहा। हालांकि पूरे दिन धूप नहीं निकली और इससे दिनचर्या पर विपरीत प्रभाव पड़ा। वहीं हल्की बारिश से पहले की गेहूं के साथ दलहनी व तिलहनी फसल को संजीवनी मिल गई है। आसमान में बादलों की उपस्थिति से बारिश के आसार हैं, लेकिन दलहनी के पिछली फसलों को नुकसान होने का अनुमान है।अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा की गति 13 किमी प्रति घंटा रही, जबकि आर्द्रता 72 फीसद रिकार्ड की गई।पिछले एक पखवारे से आए दिन मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी धूप तो अचानक बादल डेरा जमा ले रहे हैं। पिछले दिनों कई बार हल्की बूंदाबांदी और बारिश भी हुई। मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में मौसम साफ होने की उम्मीद है, लेकिन सर्द हवा का असर बना रहेगा। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा अभयदीप गौतम ने बताया कि हल्की बारिश से गेहूं की फसल के साथ दलहनी व तिलहनी फसलों को फायदा होगा। रोग की संभावना कम होने केे साथ ही फसल का तेजी से विकास होगा और गेहूं में अधिक कल्ले निकलेंगे। सरसों की फसल को नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन किसान भाई दवाओं का छिड़काव करें। ठंड कारण सरसों की फसल पर माहो का प्रकोप बढ़ सकता है, इसे सरसों की फसल दवाओं का छिड़काव कर उसे बचाया जा सकता है।
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