चंदौली। बच्चों में कुपोषण की स्थिति बढ़ती जा रही है। हर महीने दो-चार कुपोषित बच्चे सामने आ रहे हैं। यह स्थिति तब है जब केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं बच्चों के विकास के लिए ही संचालित हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो योजनाओं का क्रियान्वयन कागजों से बाहर नहीं आ पा रहा है। इसमें कोरोना संक्रमण भी ग्रहण बनकर लग गया है। वही जल्द ही लगभग 100 गांवों को चिन्हित कर कुपोषण बच्चों की समस्याओं के समाधान की पहल शुरू करने की भी तैयारी है।
जिले में 7280 दूसरी स्टेज और 740 बालक अतिकुपोषित यानि अंतिम स्टेज के हैं। जबकि सामान्य कुपोषण वाले बच्चों की संख्या 168365 है। बच्चों को कुपोषण से दूर रखने के लिए प्रत्येक आंगबनाड़ी केंद्रों पर जहां पुष्टाहार, हाट कुक्ड़ फूड योजना चल रही है वहीं फल, दूध, देशी घी तक उन्हें खिलाने का निर्देश है। इसके अलावा समय-समय पर उनका टीकाकरण, विटामिन्स की खुराक, स्वास्थ्य जांच, वजन आदि किया जाता है। लेकिन कुपोषित बच्चों की जो संख्या जिले में है और उनके लिए योजनाओं का लाभ देकर जमीन पर आने में समय लग सकता है। कोरोना संक्रमण के पहले ज्यादातर केंद्र बंद रहते हैं। 50 बच्चों के सापेक्ष बमुश्किल 10-20 बच्चे ही केंद्रों पर उपस्थित रहते हैं। वर्तमान में केंद्रों पर बच्चों की स्थिति शून्य चल रही है। हालांकि केंद्र खुले जरूर हैं। इस कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान अभिभावक बच्चों को केंद्रों पर पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं। जबकि शासन करने से घर घर पहुंच कर कुपोषित बच्चों को हर सुविधाएं दिए जाने का निर्देश है।
कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की सभी योजनाओं का एक-एक बच्चे को लाभ दिया जा रहा है। वहीं जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है। कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान कार्यक्रम प्रभावित हुआ है, लेकिन कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को निर्देश है कि बच्चों को उनके घर जाकर शासन से आ रही सुविधाएं दी जाएं।
दिलीप कुमार अर्थ संख्या अधिकारी/जिला कार्यक्रम।