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भागवत कथा के श्रवण से होता है मोह, शोक व भय का नाश

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कंदवा। भागवत कथा के श्रवण से मानव को सत्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। सभी को इस कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। इससे मोह, शोक व भय का नाश होता है और मनुष्य को भौतिक, दैहिक और दैविक तापों से मुक्ति मिलती है।
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यह बातें क्षेत्र के घोसवा गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठें दिन शुक्रवार को वृंदावन से पधारे कथावाचक विपिन दिव्यनयन सांवरिया महाराज ने कहीं। इस दौरान उन्होंने महारास लीला, श्रीकृष्ण मथुरागमन, गोपी-उद्धव संवाद, कंस वध और रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु मिलन की आस ही महारास है। कई जन्मों से प्रभु मिलन की आस लिए योगी, महात्मा, सिद्ध जन आदि गोपी बनकर ब्रज में आए और भगवान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। योगेश्वर भगवान ने कामदेव के मानमर्दन के लिए ही अनंतानंत गोपिकाओं के साथ महारास की योजना बनाई और यमुना के तट पर रास रचा कर कामदेव का मानमर्दन किया। उद्धव-गोपी संवाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि उद्धव जी गोपियों को निर्गुण ब्रह्म का उपदेश देने के लिए ब्रज पधारे लेकिन गोपियों के निष्काम भक्ति की पाठशाला में अपना ज्ञान भूल गए। कहा कि निष्काम भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ और ईश्वर को प्राप्त करने का एकमात्र माध्यम है। जब व्यक्ति संसार को भूलता है तब जगदीश मिलते हैं। पुत्र अपने माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता। भागवत में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने माता-पिता से कहा है कि जो पुत्र अपने माता-पिता की सेवा, आदर- सम्मान के साथ नहीं करता, वह नरक को प्राप्त होगा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर कंस का उद्धार किया और उसके बाद समुद्र के भीतर द्वारिका पुरी का निर्माण किया। रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रुक्मिणी का मान रखने के लिए ने द्वारिकाधीश ने उनका हरण कर उनसे विवाह किया। इस दौरान माधुरी सिंह, आशा, कंचन, मीरा, अनिता, रेनू, हरदेव सिंह, रोहित कृष्ण, विक्की, कपिल शर्मा, नेहा, रामनारायण, राजू, महेंद्र आदि मौजूद रहे।
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