फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीराम ज्ञान, मां सीता भक्ति व लक्ष्मण हैं वैराग्य के प्रतीक

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
कंदवा। मानस में प्रभु रामचंद्र ज्ञान, सीता भक्ति और लक्ष्मण वैराग्य के प्रतीक हैं। जहां ज्ञान, भक्ति और वैराग्य आ जाता है वहां की पंचवटी खिल जाती है। मनुष्य का शरीर भी पंचवटी ही है, मगर इस शरीर में जब तक रामचंद्र रुपी ज्ञान, सीता रुपी भक्ति और लक्ष्मण रुपी वैराग्य का प्रवेश नहीं होगा तब तक यह खिल नहीं सकती। मनुष्य को शरीर रुपी इस पंचवटी से सदा अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
विज्ञापन

ये बातें गोरखा हनुमान मंदिर पर चल रहे पांच दिवसीय संगीतमय मानस कथा के पांचवें दिन मंगलवार को जौनपुर से पधारे मानस प्रवक्ता पंडित रामेश्वरानंद जी महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि जब भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ पंचवटी में प्रवेश किए तो पंचवटी का वातावरण हर भरा हो गया। हनुमान जी परम वैराग्य, कुम्भकर्ण अहंकार और मेघनाथ काम का प्रतीक है। आज का युवा मोह रूपी सीता को ढूंढ रहा है। भरहुलिया से पधारी मानस मंजरी विभा उपाध्याय ने कहा कि मानव कल्याण के लिए कोई कार्य बड़ा या छोटा नहीं होता। अगर मनुष्य बड़े से बड़े कार्य को छोटा बन कर करता है तो निश्चित ही समाज उसे आदर व सम्मान देगा। रामभक्त हनुमान ने भी अपने जीवन के जितने बड़े कार्य किए सूक्ष्म रूप धारण कर ही किए। कहा कि हनुमान का चरित्र संपूर्ण मानव मात्र के लिए आदर्श है। कलियुग में हनुमान की भक्ति से ही मानव का कल्याण हो सकता है। प्रभु श्रीराम जितने भी लक्ष्य लेकर पृथ्वी पर आए, उन्हें हनुमान जी ने ही पूरा किया। भगवान राम के हृदय में भाई भरत, जानकी, लक्ष्मण, सुग्रीव व विभीषण बसते थे पर इन सबकी रक्षा हनुमान जी ने की। प्रभु राम ने हनुमान से कुछ मांगने की इच्छा पूछी तो उन्होंने सिर्फ उनके दोनों चरण कमल के दर्शन मांगे। इस दौरान डा.जलालुद्दीन, हरीश सिंह, डा.समर बहादुर सिंह, दीपू सिंह, धनंजय त्रिपाठी, घुरहू सिंह, कपिलदेव उपाध्याय, त्रिलोक यादव, दिनेश तिवारी मौजूद रहे ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें