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श्रद्धा व विश्वास का केंद्र है मां काली का शवासनारूढ़ विग्रह

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चकिया। नगर में स्थित मां काली मंदिर देवी उपासकों के श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर में मां काली का शवासनारूढ़ विग्रह दर्शनीय हैं तो मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी तथा महासरस्वती के साथ ही महादेव शंकर के तीन शिवलिंग और विध्नहरण भगवान गणेश की प्रतिमा लोगों को आशीर्वाद देती हैं। खजुराहो शैली में निर्मित मां काली मंदिर का निर्माण 1791में पूर्व काशी नरेश महाराजा उदित नारायण सिंह ने कराया था।
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वाराणसी गजेटियर व काशी खंड में मिले प्रमाणों के अनुसार राजा को स्वप्न में मां काली ने दर्शन दिया और कहा कि वे रामनगर किले के पास गंगा की बीच धारा में स्थित हैं। सुबह होने पर काशी नरेश ने मूर्ति को गंगा की बीच धारा की तलहटी से निकालकर अपने राज्य के चकिया में स्थापित किया। उन्होंने मंदिर का निर्माण अपने कार्यकाल में ही आरंभ करा दिया। बाद में उसे पूरा प्रसिद्ध नारायण सिंह ने कराया। मां काली के शवासनारूढ़ विग्रह की पंचोपचार विधि से पूजन अर्चन का क्रम आज भी जारी है। चकिया के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी व बिहार प्रांत के भभुआ जिले से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रहती है।
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