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हनुमान का चरित्र पूरी मानव जाति के लिए आदर्श

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मानव कल्याण के लिए कोई कार्य बड़ा या छोटा नहीं होता। अगर मनुष्य बड़े से बड़े कार्य को छोटा बन कर करता है तो निश्चित रूप से समाज उसे आदर व सम्मान देगा। रामभक्त हनुमान ने भी अपने जीवन के जितने बड़े कार्य किए, सूक्ष्म रूप धारण कर ही किए। तभी हम उन्हें आज भी पूजते हैं। हनुमान का चरित्र संपूर्ण मानव के लिए आदर्श है। ये विचार रोहतास बिहार से आए मानस पीयूष विनोद पाठक ने मां मंशा देवी मंदिर परिसर बरहनी में आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि हनुमान ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो बल, बुद्धि व विद्या तीनों प्रदान करते हैं। कलियुग में हनुमान की भक्ति से ही मानव का कल्याण होने वाला है। कहा कि प्रभु राम धरती पर जितने भी लक्ष्य लेकर पृथ्वी पर आए, उसे हनुमान ने ही पूरा किया। भगवान राम के हृदय में भाई भरत, जानकी, लक्ष्मण, सुग्रीव एवं विभीषण बसते थे, परन्तु इन सबकी रक्षा हनुमान ने की। प्रभु राम ने हनुमान से कुछ मांगने की इच्छा पूछी तो उन्होंने सिर्फ दोनों चरण कमल मांगे। कथा के दौरान हरिद्वार सिंह, मिठाई सिंह, सूर्यभान सिंह, सूर्यनाथ सिंह, धनंजय त्रिपाठी, सुरेंद्र तिवारी, शीतल सिंह, माधुरी सिंह, रुचि श्रीवास्तव, मांडवी त्रिपाठी, वंदना त्रिपाठी, अनन्या, आकांक्षा, सोनी, श्वेता, संजय सिंह, अंजनी सिंह मौजूद रहे। संचालन कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया।
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