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भारत सरकार की योजनाओं का हवा निकाल रही है शिक्षा विभाग

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चंदौली। परिषदीय विद्यालयों में अधिकांश योजनाएं भले ही केंद्र सरकार की हों लेकिन शिक्षा विभाग के लोग भारत सरकार की योजनाओं की हवा निकालने में लगे हुए हैं। वर्ष 2014 के बाद ही भारत सरकार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कर्मचारियों के विवरण को मानव संपदा के तहत आन लाइन करने के लिए दिशा निर्देश दिया था। लेकिन तीन वर्ष में आज तक किसी भी कर्मचारियों का विवरण आन लाइन नहीं किया गया।
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भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभागों को पेपरलेस बनाने के लिए मुहिम चलाई थी। इसके लिए शिक्षा विभाग को मानव संपदा के कार्यक्रम के तहत एक-एक कर्मचारियों का रिकार्ड आन लाइन करने के लिए कहा था। मानव संपदा में जो रिकार्ड आन लाइन किया जाना था उसमें शिक्षा विभाग के शिक्षक, बाबू व चपरासी के साथ-साथ संविदा पर कार्य कर रहे लोगों के विवरण भी फार्मेट पर भरना था। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने विभाग को वर्ष 2014 में ही दिशा निर्देश दे दिया था। लेकिन राज्य में दूसरे पार्टी की सरकार होने के बाद इस योजना का अधिकारी भी हवा निकालने से नहीं चूक रहे थे। अधिकारियों के इस लापरवाही पर उन्हें कई बार नोटिस भी जारी हो चुकी है, इसके बाद भी आदतों में कोई सुधार होने का नाम नहीं ले रहा है। अब जब राज्य व केंद्र दोनों में बीजेपी की सरकार बनी है। उसमें भी प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्य करने की शैली को देखने के बाद अधिकारी पूरी तरह से हरकत में है। तीन वर्ष तक जो कार्य नहीं हो पाया है। उसे तेजी के साथ निपटाने में लगे हुए हैं। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भोलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मानव संपदा के तहत शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का विवरण आन लाइन किया जा रहा है।
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