चंदौली। सरकार ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों को ग्रामीणों के शिक्षा और स्वास्थ्य का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। यहां बच्चों के देखभाल, कुपोषण का उपचार, टीकाकरण सहित पोषण का काम होता है। सरकार लगातार इन आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित और सुविधा सम्पन्न बना रही है। इसके बीच विडंबना यह है कि जिले के 34 आंगनबाड़ी केंद्रों को आज तक अपना भवन ही नहीं मिल पाया है। वे किराया के मकान में ही चल रहे हैं। ऐसे में व्यवस्था में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद में कुपोषण को लेकर सरकार काफी गंभीर है इसके लिए 1873 से आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। जहां पर सरकार की योजनाओं के माध्यम से कुपोषण रोकने के लिए प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अभी भी पीडीडीयू नगर के बिछड़ी, नई बस्ती, हनुमानपुर, सुभाषनगर, कैलाशपुरी सहित जिले के 34 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन पर चलते हैं। अधिकारियों की माने तो इसकी सूचना शासन को अवगत कराया गया है जल्द ही इस पर अमल होने की संभावना है। जनपद में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही है। यही नहीं सामुदायिक गतविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसमें गोद भराई संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, वास डे, सुपोषण दिवस व किशोरी दिवस भी शामिल है।इसके लिए जनपद में कुल 1873 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। 732 आंगनवाड़ी केंद्र विभागीय भवन में संचालित हैं। वही 706 प्राथमिक विद्यालय,401समुदायिक पंचायती एवं भवन में संचालित होते हैं। यही नहीं अभी भी 34 आंगनबाड़ी के किराए के भवन में संचालित होते हैं। विभागीय अधिकारियों की माने तो जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्र अपने भवनों में संचालित होने लगेंगे।
जनपद में समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों को स्वयं विभागीय भवन उपलब्ध कराने के लिए महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत उनको प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। निर्देश मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।-जया त्रिपाठी जिला कार्यक्रम अधिकारी।