पीडीडीयू नगर। जिले 280 स्थानों पर भव्य दुर्गा पूजा पंडालों का निर्माण किया गया है। इसमें किसी पूजा समिति ने अग्नि शमन की अनुमति नहीं ली है। पिछले दिनों कोलकाता में बारिश के दौरान पंडाल में करंट की चपेट में आने से पांच लोगों की मौत हुई थी। वहीं मध्य प्रदेश में भी दो लोगों की मौत हो चुकी है। पंडालों में आग लगने की भी घटनाएं भी होती हैं। लेकिन सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा ।
वाराणसी से सटे चंदौली जिले में दुर्गा पूजा बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस वर्ष भी 280 स्थानों पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल बनाए गए हैं। नगर के इंडियन इंस्टीट्यूट कॉलोनी, मानस नगर, राम मंदिर, परमार कटरा, गल्ला मंडी, जायसवाल भवन, गुरूद्वारा, रविनगर, पटेल नगर, गया कॉलोनी, सेंट्रल कॉलोनी, लॉठ नंबर एक, लाॅठ नंबर दो, बिछुआ मंदिर, डीजल कॉलोनी, अमोघपुर, चंदासी, पड़ाव सहित अन्य स्थानों पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं।
इसी तरह जिले के चंदौली, चकिया, धानापुर, सकलडीहा सहित जिले के सभी इलाके में पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं। सभी पूजा समितियां अपने पंडालों को भव्य बना रही हैं। कई स्थानों पर 30 फुट से भी ऊंचे पंडाल बनाए जा रहे हैं। कुछ पंडालों में दुर्गा प्रतिमा रख कर पूजा शुरू की जा चुकी हैं। वहीं अधिकतर पंडालों में 29, 30 सितंबर और एक अक्तूबर को भव्य मेला लगेगा। यहां पंडालों में दर्शन पूजन के लिए भीड़ जुटेगी। मेला में झूला आदि भी लगाए जा रहे हैं। नियम के अनुसार पूजा समितियों को एसडीएम के यहां से अनुमति लेनी होती है। यहां अग्नि शमन विभाग, पुलिस आदि अपनी जांच करती है और सुरक्षा के मानक को देख कर अपनी रिपोर्ट देती है। इसके बाद पूजा का आयोजन किया जाता है। अग्नि शमन विभाग में अब तक किसी पूजा समिति के पूजा पंडाल निर्माण की सूचना नहीं पहुंची है और न ही अग्नि शमन विभाग ने अनुमति दी है।
पीडीडीयू नगर। भले ही दुर्गा पूजा पंडाल निर्माण कराने वाली समितियों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली है लेकिन अग्नि शमन विभाग के अधिकारी पंडालों में पहुंचकर जांच पड़ताल कर रहे हैं। विभाग के अधिकारी पंडालों में पहुंच कर दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा के पूरा ख्याल रखने, मानक के अनुरूप काम करने और शासन की ओर जारी गाइड लाइन के बारे में बता रहे हैं। अग्नि शमन अधिकारी मुन्नी सिंह की देख रेख में विभाग के अधिकारियाें ने शनिवार को पीडीडीयू नगर के विभिन्न पंडालों में पहुंच कर जांच पडताल की और समितियों को जागरूक किया।
पीडीडीयू नगर। भारतीय मानक ब्यूरो अनुसार किसी भी दशा में पंडाल 3 मीटर से ऊंचाई का न लगाया जाए, पंडाल बनाने में सिंथेटिक सामग्री से बने कपड़े या रस्सी का प्रयोग न करें, पंडाल के चारों तरफ 4.5 मीटर खुला स्थान होना चाहिए, इससे लोग सुरक्षित बाहर निकल सके। इसी तरह पंडाल बिजली की लाइन के नीचे किसी भी दशा में न लगाया जाए, कोई भी पंडाल रेलवे लाईन, बिजली के सब स्टेशन, चिमनी या भट्टी से कम से कम 15 मीटर दूर लगाया जाए। नियम के अनुसार बाहर निकलने का गेट 5 मीटर से कम चौड़ा न हो और अगर रास्ता मेहराब (आर्च) बनाया जाएं तो भूमि तल से ऊंचाई 5 मीटर से कम नहीं होना चाहिए, सड़क से पंडाल की दूरी 45 मीटर से अधिक किसी भी दशा में नहीं होनी चाहिए। बाहर निकलने का रास्ता गुफा की तरह नहीं होना चाहिए। कुर्सियों किनारे जगह छोड़कर लगाई जाए और बारह कुर्सियों के बाद 1.5 मीटर की जगह छोड़ी जाए। बिजली की व्यवस्था विद्युत कार्य के लाइसेंसधारी ठेकेदारों से ही कराई जाए, तारखुले नहीं होने चाहिए। इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था होनी चाहिए।
दुर्गा पूजा पंडालों के साथ ही राम लीला कमेटियों को भी अग्नि शमन विभाग से एनओसी लेनी चाहिए। नियम के अनुसार समितियां एसडीएम के यहां आवेदन करती हैं। यहां से अग्नि शमन, बिजली, पुलिस विभाग से जांच कराई जाती है। इस वर्ष किसी पूजा पंडाल ने अनुमति नहीं ली है।
कुमार रमाशंकर तिवारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, चंदौली