श्रीमद् भागवत महापुराण अठ्ठारह महापुराणों में सबसे पवित्र पुराण है । इस महापुराण में भगवान विष्णु के अवतार और कृष्ण की लीलाओं के अलावा भगवान के भक्त और उनकी मुक्ति की कथाएं भी मौजूद हैं। यह विचार क्षेत्र के चिरईगांव स्थित मां रेहणा भगवती मंदिर परिसर में चल रहे सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदरराज जी महाराज ने व्यक्त किए ।
दूसरे दिन श्रोताओं पर भक्ति रस की वर्षा करते हुए सुंदरराज जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में मन ,वाणी, कर्म से किसी को भी कष्ट नहीं देना चाहिए ।ऐसा व्यक्ति जो किसी को भी कष्ट नहीं देता, वह सीधे बैकुंठ में जाता है। कहा कि सदगुरु के बताए मार्ग का अनुसरण कर और भगवान के नाम के सुमिरन से ही विश्व का कल्याण संभव है ।स्वामी जी ने सुखदेव मुनि के जन्म, राजा परीक्षित के जन्म और उनको ऋषि के श्राप की कथा का भी वर्णन किया। कहा कि व्यक्ति को सांसारिक और भौतिक सुखों का त्याग कर भगवान का भजन करना चाहिए। यही भागवत का सार है। कथा के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब भी देखने को मिली। बड़ी संख्या में मुस्लिम भाई बहन भी कथा सुनने के लिए पहुंचे। आरती और प्रसाद वितरण के साथ दूसरे दिन की कथा का समापन हुआ। इस मौके पर रेनू सिंह, आकांक्षा, परवीन आलम, मृत्युंजय सिंह, उदय नारायण सिंह, वंदना सिंह, सीमा, पूनम, असगर, इस्लाम, नरेंद्र सिंह, जितेंद्र, अंकित, रेशमा, बिंदु वाला, मुन्ना, जोखू, प्रेम, लल्लन, सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे ।