टांडाकला। केरल से मानसून लौटने और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार मानूसनी बारिश से गंगा के साथ छोटी-बड़ी नदियों में बढ़ाव तेज हो गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने से संकट और बढ़ सकता है। वहां गंगा किनारे के टांडाकला, महुवारी कला सहित कई गांवों में कटान और तेज होने से लोग सहम गए हैं। गंगा नदी के जलस्तर में पिछले आठ दिनों से धीमी ही लेकिन लगातार वृद्धि होने से लोग अपने सहित अपने मवेशियों को सुरक्षित ठिकाने लगाने की व्यवस्था में है। तकरीबन डेढ़ से दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है।
गंगा किनारे के रहने वाले सन् 1978, 2004, और 2013 के अलावा दो साल पहले 2016 में आई बाढ की विभीषिका को याद कर सिहर जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पूर्व की बाढ़ की स्थिति जैसा सामना करना पड़ सकता है। इस बार जिले में मानसून देर से आया लेकिन जब से आया है तब से हो रही लगातार बारिश से संकट खड़ा होने लगा है। निचले इलाकों मेँ पानी भरने से मवेशियों के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। गंगा किनारे कृषि योग्य भूमि और रिहायसी भूमि की कटान तेज हो गई है। गांव के लालचंद का कहना है कि गंगा में बढ़ाव से कटान तेज हो गई है। किनारे मकान होने के कारण अब चिंताएं बढ़ गई है। अमित पांडेय का कहना है कि हर साल कटान से सैकड़ों एकड़ जमीन गंगा में समा जाती है। लेकिन प्रशासन की ओर से इसे रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।