चंदौली। जिले में विकास कार्यों की समीक्षा करने आए मुख्यमंत्री के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण बुधवार को तेवर में थे। कलेक्ट्रेट सभागार में आकांक्षात्मक जनपद चंदौली और सोनभद्र के अधिकारियों के साथ बैठक में विकास कार्यों और नीति आयोग के मानकों के प्रगति की समीक्षा की। वह विभागवार कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बिजली, सड़क के अलावा आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय पोषाहार मिशन और मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनओं सहित 42 बिंदुओं की हकीकत जानी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग में खामियां मिलने पर सीएमओ डा. पीके मिश्र फटकार लगाई। साथ ही दूसरे लापरवाह अफसरों को चेताया कि जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं की अनदेखी करने और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योजनाएं गांवों तक पहुंचनी चाहिए। ताकि इसका लाभ गांव में रहने वाले गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि चंदौली और सोनभद्र के अधिकारियों को निर्देश दिया कि शासन की ओर से संचालित योजनाओं या कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार कराते हुए लोगों को लाभान्वित किया जाय। अस्पतालों में चिकित्सकों और दवाओं की उपलब्धता हो। शिकायत मिलने पर जिम्मेदार कार्रवाई को तैयार रहें। अधिकारी कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को समय से पोषाहार वितरित कराएं और योजनाओं की मानिटरिंग करें। साथ ही सीडीओ को निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण करें और अनुपस्थित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें। किसानों की आय बढ़ाने और जागरूकता के लिए किसान पाठशाला और गोष्ठियों के आयोजन करने के लिए कृषि उपनिदेशक को निर्देश दिया। साथ ही मृदा परीक्षण और उन्नत बीजों की उपलब्धता सरकारी गोदामों पर कराने के लिए निर्देश दिया। बिजली एक्सईएन को निर्देश दिए कि सौभाग्य योजना के तहत दिसंबर माह के अंत तक सभी कार्य पूर्ण करा ले अन्यथा संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस दौरान डीएम नवनीत सिंह ने बताया कि कौशल विकास मिशन के तहत जनपद में छह बार रोजगार मेले का आयोजन हुआ है। जिसमें पांच हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिला है। बैठक में सोनभद्र के डीएम अमित कुमार सिंह, सीडीओ सुनील कुमार, चंदौली के सीडीओ डा. अभय कुमार श्रीवास्तव, एसडीएम मुगलसराय आनंद वर्धन, सीएमओ डा. पीके मिश्रा, बीएसए भोलेंद्र प्रताप सिंह, डीपीओ नीलम मेहता, सहायक निबंधक सोमी सिंह, डिप्टी आरएमओ अनूप श्रीवास्तव, डीसी मनरेगा धर्मजीत सिंह, समाज कल्याण अधिकारी आरके सिंह आदि उपस्थित रहे।
चंदौली। सीएम योगी आदित्यनाथ के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण ने बुधवार को निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन, मंडी समिति के धान क्रय केंद्र, मातृ शिशु विंग व जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। मरीजों से मिलने वाली सुविधाओं और दवा की उपलब्धता भी जानी। लेकिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के संचालक द्वारा चकिया के सीएमस और डाक्टरों के द्वारा बाहर की दवा लिखने की जानकारी पर सीएम के सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने सीएमओ को पिछले छह माह में दवाओं की बिक्री व चिकित्सकों की लिखी दवाओं की रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण ने निर्माणाधीन कलक्ट्रेट भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान कार्यदाई संस्था निर्माण निगम के प्रोजेक्टर मैनेजर से निर्माण कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली। वहीं भवन का नक्शे आदि का भी अवलोकन किया। उन्होंने फरवरी माह के अंत तक हर हाल में निर्माण कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिया। इसके बाद सचिव नवीन कृषि मंडी पहुंचे। यहां उन्होंने विपणन शाखा व यूपी एग्रो के धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। डिप्टी आरएमओ व केंद्र प्रभारी से अब तक हुई खरीद के बारे में जानकारी ली। किसानों को दो सप्ताह के अंदर भुगतान करने के लिए निर्देशित किया। कहा कि धान क्रय शासन की प्राथमिकता में शामिल है। इसके बाद वह जिला अस्पताल परिसर स्थित मातृ व शिशु विंग पहुंचे। इस दौरान अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केसी सिंह से अस्पताल में मौजूद सुविधाओं व मरीजों के इलाज के बारे में पूछताछ की। वहीं वार्डों में पहुंचकर मरीजों का हाल जाना। उन्होंने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने पर बल दिया। इसके बाद जिला अस्पताल का जायजा लिया। यहां वार्डों का निरीक्षण कर साफ-सफाई व्यवस्था व स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल की। इस दौरान प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के संचालक सतीश कुमार सिंह ने चकिया संयुक्त चिकित्सालय में डाक्टरों की ओर से बाहर की दवा लिखने की शिकायत की। कहा कि इसकी वजह से वहां सरकारी दवाओं की बिक्री काफी कम होती है। इस पर सचिव भड़क उठे। उन्होंने डीएम नवनीत सिंह चहल और सीएमओ डा. पीके मिश्रा को पिछले छह माह की रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया। कहा कि अस्पताल स्थित दवा स्टोर की बिक्री व अस्पताल में डाक्टरों की लिखी गई दवाइयों के आंकड़े की रिपोर्ट तैयार कर भेजें। इसके बाद संबंधित चिकित्सकों व चिकित्सा अधीक्षक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल, सीडीओ डा. एके श्रीवास्तव, सीएमएस डा. अरविंद सिंह, डिप्टी आरएमओ अनूप कुमार श्रीवास्तव, डीसी मनरेगा धर्मजीत सिंह उपस्थित रहे।
चंदौली (ब्यूरो)। सीएम के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण मातृ व शिशु विंग के निरीक्षण के दौरान जैसे ही दूसरे तल पर जाने के लिए लिफ्ट में दाखिल हुए, वैसे अस्पताल की बिजली चली गई। यह देख अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे। लेकिन तुरंत जनरेटर चालू होने के बाद सभी ने राहत सांस ली। दस दौरान सचिव को ग्राउंड व पहले फ्लोर पर पहुंचने में पांच मिनट का समय लग गया।
चंदौली (ब्यूरो)।जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान पूर्व सीएमएस डा. उमापति द्विवेदी ने सीएम के सचिव से मिलकर सीएमएस व सीएमओ की शिकायत की। विभागीय अधिकारियों के मिली भगत के चलते उन्हें जिला अस्पताल से हटाकर चकिया तबादला करा दिया गया। अभी तक सीएमओ, सीएमएस की ओर से रिलिविंग लेटर नहीं दिया गया। इसकी वजह से नए नियुक्ति स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके हैं। इस पर सचिव ने डीएम नवनीत सिंह चहल को मामले में हस्तक्षेप कर रिलिविंग लेटर दिलाने का निर्देश दिया।
चंदौली। सीएम के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि आकांक्षात्मक जनपद चंदौली व सोनभद्र में विकास की दृष्टि से काफी बेहतर कार्य हुए हैं। देश के 115 अतिपिछड़े जिलों में चंदौली की स्थिति पहले से काफी बदल गई है और यह डेल्टा रैंकिंग 18वें पायदान पर पहुंच चुका है। जबकि सोनभद्र अभी 58वें स्थान पर है। इसके अलावा दोनों जनपदों में 42 बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता है। सचिव बुधवार को समीक्षा बैठक के बाद कलक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से वार्ता के दौरान यह जानकारी दी।
कहा कि नीति आयोग की ओर से प्रदेश में आठ पिछड़े जिलों को आकांक्षात्मक घोषित किया गया है। उस समय आयोग की रैंकिंग में सोनभद्र और चंदौली काफी पीछे थे। चंदौली 79वें और सोनभद्र 95वीं रैंक पर था। बिंदुवार कार्यक्रमों में सुधार हुआ, तो चंदौली की डेल्टा रैंकिंग 18वें स्थान आ गई। जबकि सोनभद्र अभी भी 58वें स्थान पर है। पूर्व की रैंकिंग के हिसाब से दोनों जनपदों में काफी सुधार हुआ। सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पोषण के अलावा अन्य कार्यों की हर माह समीक्षा कर रही है। कमियों को दूर करने के सुझाव भी दिए जाते हैं। कहा कि दोनों जनपदों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। दोनों जिलों के जिलाधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजने को निर्देश दिया गया है। उन्होंने डीएम को ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के आधार पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। कहा कि हर हाल में न्यूनतम 18 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। इसमें लापरवाही पर शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।