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बसों के चालक बदलते हैं पर नहीं बदलता मोबाइल नंबर

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चंदौली। जनपद में स्कूल संचालकों की मनमानी से स्कूली वाहन बेरोक टोक सड़कों पर दौड़ती नजर आती है। चालकों के आए दिन फेरबदल हो जाते है, लेकिन स्कूली वाहनों पर पूर्व के चालकों का ही मोबाइल नंबर रह जाता है। इससे कभी कोई अभिभावकों को परेशानी हो तो पूर्व के चालक से ही बात हो पाती है। वहीं परिवहन विभाग कभी भी स्कूली वाहनों के मोबाइल नबंर व अन्य कागजातों का पड़ताल नहीं करता है। इससे चालक व अभिभावको ं दोनों को परेशानी का समाना करना पड़ता है।
जनपद में कई स्कूल ऐसे है जहां वाहनों से बच्चों का आवगमन होता है। इसमें सकड़ों स्कूली वाहन प्रतिदिन सड़कों पर दौड़ते है, लेकिन परिवहन विभाग के यहां मात्र 54 स्कूली वाहन पंजीकृत है। शासन ने स्कूल संचालकों व वाहनों के चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर ने निर्देश दिया था कि बस के पीछे स्कूल का नाम, चालक का नाम और लाइसेंस नंबर, स्कूल के व्हीकल इंचार्ज का मोबाइल नंबर, पुलिस का नंबर होना चाहिए। इसके वाबजूद बसों और स्कूलों के संचालकों की ओर से इसका पालन नाम मात्र किया जा रहा है। वहीं बहुत से बसों के चालक और स्कूलों के व्हीकल इंचार्ज के बदल जाने के बाद मोबाइल नंबर नहीं बदले जा रहे । इसका नतीजा यह होता है कि लोग चालकों की शिकायत करने के लिए नंबर मिलाते हैं तो पता चलता है कि फोन कहीं और लग गया है। वहीं शिकायत के बाद भी परिवहन विभाग इसे गंभीरता से नहीं लेता है। इससे आए दिन लोगों को परेशान होना पड़ता है।
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जनपद के स्कूली वाहनों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर कागजातों व अन्य सुविधाओं की जांच की जाती है। इसमें दोषी पाए जाने पर स्कूल वाहन के स्वामी कर कार्रवाई की जाती है। जल्द ही वाहनों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। विजय प्रकाश, एआरटीओ पर्वतन।
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