नौगढ। विकास खंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में इंदिरा आवास में चयनीत डेढ सौ लाभार्थियों द्वारा प्रथम किस्त के भुगतान के बाद आवास न बनाने पर डीएम के आदेश पर धन रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया गया है। डीएम के आदेश के बाद से अमीन गांवों में जाकर लाभार्थियों को रिकवरी का नोटिस थमा रहे हैं। इससे इंदिरा आवास के लाभार्थियों में खलबली मची है। लाभार्थियों का आरोप है कि पंचायत सचिव और प्रधान द्वारा प्रत्येक आवास के एवज में दस हजार रुपये लिए गए थे।
विकास खंड क्षेत्र के जमसोती, लौवारी, मरवटिया, अमदहा, चरनपुर सहित 27 ग्राम प्रचायतों में वर्ष 2012 से 2016 तक एक सौ पचास लोगों को इंदिरा आवास के तहत चयन किया गया था। इसके लिए शासन द्वारा बकायदा प्रथम किस्त के रुप में 37 हजार 500 रुपये का भुगतान उनके खाते में किया गया । चार वर्ष बीत जाने के बाद भी एक अब तक एक भी आवास का निर्माण नहीं हुआ। कुछ लोगों द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने के बाद दो माह पूर्व लखनऊ से आए ग्राम विकास विभाग के दो अधिकारियों ने गांवों में जाकर भौतिक सत्यापन किया। यहां कुछ आवास अधूरे तो कई आवासों की नीव भी नहीं भरी गई थी। खंड विकास अधिकारी ने पिछले 21 जून को अपर जिलाधिकारी को पत्र भेजकर लाभार्थियों से धन कर रिकवरी कराने की मांग किया गया था। डीएम हेमंत कुमार ने बीडीओं के पत्र को संज्ञान में लेते हुए 24 जून को तहसीलदार नौगढ को इंदिरा आवास के पात्र लोगों से सरकारी धन की रिकवरी कराने का आदेश जारी किया था। तहसीलदार नौगढ ने क्षेत्र के विभीन्न गांवों के एक सौ पचास लोगों के खिलाफ आरसी जारी करते हुए संग्रह अमीनों को लाभार्थियों से रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया है। संग्रह अमीन विभिन्न गांवों में पहुंचकर लाभार्थियों को नोटिस थमाने का कार्य शुरू कर दिया है। राजस्व विभाग द्वारा कार्यवाई करने की जानकारी होने पर लाभार्थियों में हड़कंप मच गया है। लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव और प्रधान द्वारा प्रथम किस्त से मिले रुपयों में सुविधा शुल्क के नाम पर प्रति आवास दस हजार रुपये लिये गए है। इस संबंध में तहसीलदार राजाराम का कहना है कि किश्त जारी होने के बाद भी आवास निर्माण न कराए जाने पर धन की रिकवरी की जाएगी।