पीडीडीयू नगर। नगर के यूरोपियन कॉलोनी स्थित बाल येशु तीर्थ मंदिर (क्राइस्ट द किंग चर्च) से दिसंबर माह के पहले रविवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें देश के कोने-कोने से मसीही समुदाय के हजारों लोगों के साथ विभिन्न इलाकों से आए धर्माचार्य शामिल हुए। बाल यीशु की प्रतिमा के साथ निकला जुलूस नगर भ्रमण के बाद चर्च पहुंच कर समाप्त हुआ। शोभायात्रा में शामिल लोगों ने कैरोल गीत गाए और प्रभु यीशु को याद किया। इसके पूर्व चर्च में प्रार्थना सभा और और जुलूस के बाद शाम को विविध आयोजन हुए। इस मौके पर चर्च के समीप मेला भी लगा।
रविवार की सुबह से ही शोभायात्रा की तैयारी शुरू हो गई थी। यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बंगाल, गोवा सहित देश के कोने कोने से ईसाई धर्मावलंबी पहले ही पहुंच गए थे। सुबह सभी तैयार होकर चर्च पहुंचे। यहां प्रार्थना सभा हुई। इसके बाद दोपहर दो बजे से चर्च प्रांगण से जुलूस निकाली गई। जुुलूस रेलवे स्टेशन, जीटी रोड होते हुए सुभाष पार्क पहुंचा। यहां से रोजा कालोनी से यूरोपियन कॉलोनी में चर्च पहुंच कर जुलूस समाप्त हुआ। जुलूस में सबसे आगे पल्ली पुरोहित व मुगलसराय चर्च के फादर विपिन सीजे धर्मचिह्न लेकर चल रहे थे। इनके साथ बाल येशु की आकर्षक प्रतिमा लेकर अतिथि के रूप में आए जबलपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जेराल्ड अल्मेड़ा, वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष यूजिन जोसेफ रहे। इनके पीछे हजारों लोग कतारबद्ध होकर चल रहे थे।
नगर के यूरोपियन कॉलोनी स्थित चर्च बाल यीशु तीर्थ पूरे देश के तीन तीर्थों में एक है। वर्ष 1835 में बना कैथोलिक चर्च की तर्ज पर देश में नासिक और बंगलूरू में भी बाल यीशु तीर्थ है। यहां से शोभायात्रा निकालने की शुरूआत बाल येशु तीर्थ के फादर स्टेनले डिसूजा ने तीन दशक पूर्व की थी। बाल यीशु तीर्थ शोभायात्रा में लोकसभा अध्यक्ष रहे पीए संगमा भी शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष महापर्व की शुरूआत 26 नवंबर से हुई। 26 से 28 नवंबर तक शाम छह बजे से आठ बजे तक पवित्र मिस्सा बलिदान एवं नोविना प्रार्थना हुई। 29 नवंबर से एक दिसंबर तक फादर विनीत ने सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक प्रवचन और चंगाई प्रार्थना की। शाम छह बजे से आठ बजे तक प्रवचन, मिस्सा बलिदान और नोविना प्रार्थना की गई। इसके पूर्व जुलूस के मद्देनजर चर्च को आकर्षक ढंग से सजाया गया और पूरे नगर में जीटी रोड के खंभों पर लाउडस्पीकर लगाए गए। इस पर दिन भर बाल यीशु के गीत सुनाए गए । जुलूस के बाद रात में चर्च प्रांगण में कैंडल जला विश्व शांति की कामना की गई।