सीबीआई ने मंगलवार को कुंडा क्षेत्र के पुणेमऊ गांव के पास से तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। जिन्हें पकड़ा गया है, उनके नाम नन्हें सिंह, संतोष सिंह उर्फ देवा और राम मूरत बताए जा रहे हैं।
तीनों ही पूर्व मंत्री राजा भैया से जुड़े बताए जाते हैं और उनके रिश्ते गुड्डू व राजीव से भी हैं। हालांकि, इन तीनों के नाम प्रतापगढ़ मामले में दर्ज चारों मुकदमों में से किसी में नहीं हैं, लेकिन उनके आरोपियों से लगातार संपर्क में होने की जानकारी सामने आई है।
टीम ने गायब असलहों की तलाश में बलीपुर गांव के पीछे कछार गई और जंगल में कुछ तलाशती रही। मारे गए प्रधान नन्हें यादव के एक भाई पवन की तलाश में टीम के दो सदस्य इलाहाबाद के फाफामऊ कस्बे गए।
इस बीच अदालत द्वारा मंगलवार को दो आरोपी गुड्डू सिंह और राजीव सिंह की रिमांड स्वीकृत होने के बाद सीबीआई की टीम उन्हें वापस लेकर प्रतापगढ़ जेल चली गई, जहां से उन्हें बुधवार को रिमांड पर लिया जाना है। सीबीआई इन दोनों आरोपियों को प्रतापगढ़ जेल से मंगलवार सुबह ही लखनऊ लेकर आई थी।
सीबीआई की टीम कैसरबाग स्थित सीबीआई की विशेष अदालत पर सुबह साढ़े नौ बजे ही पहुंच गई थी। यहां अदालत कक्ष के बाहर बैठे गुड्डू सिंह ने कहा कि उसने तो प्रतापगढ़ पुलिस को भी सारी बात बता दी है। सीबीआई पूछताछ करेगी तो उन्हें भी बताया जाएगा।
दोनों आरोपियों ने पुलिस को जो बयान दिया है उसके अनुसार नन्हें व कामता के बीच एक जमीन को लेकर पुराना विवाद चला आ रहा है और लगभग दो माह पहले जब कामता ने अपने नाती की शादी की तो नन्हें और सुरेश ने वहां जाकर न सिर्फ उपद्रव किया बल्कि दूल्हे की मोटर साइकिल भी छीन लाए थे। इस घटना की शिकायत नन्हें ने हथिगवां थाने में की थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई थी। इसी अपमान का बदला लेने के लिए हत्या की गई।
सीबीआई का मानना है कि ग्राम प्रधान नन्हें यादव और उनके भाई सुरेश की हत्या के आरोप में गिरफ्तार पूर्व मंत्री राजा भैया के खास गुड्डू सिंह व उसके भाई राजीव सिंह से पूछताछ में कई राज खुलने की उम्मीद है। सीबीआई दोनों आरोपियों का कुछ अन्य लोगों से भी सामना कराने की तैयारी में है। जिनसे सामना कराया जाना है, उन्हें सीबीआई ने मंगलवार को ही पुणेमऊ गांव से उठाया है।
घटना के समय लखनऊ में था
गुड्डू ने अपने बचाव में तो यह भी कहा है कि जब घटना हुई वह और राजीव दोनों ही लखनऊ में मौजूद थे, जिसे वह साबित करा सकता है।
गुड्डू सिंह का कहना था कि गांव से जुड़ा होने की वजह से उसकी मुलाकात दोनों ही पक्षों के लोगों से होती थी। इनमें वह भी उसके जानने वाले हैं जो घटना में आरोपी बनाए गए हैं और उनसे भी परिचय है, जिनके यहां घटना हुई। सीओ जियाउल हक की मौत के बारे में कुछ जानकारी होने पर गुड्डू सिंह ने पुलिस को अनभिज्ञता जताई है।
बेती कोठी के इर्द गिर्द मंडराती रही सीबीआई
सीबीआई टीम राजा भैया की बेती कोठी के इर्द गिर्द मंडराती रही। चायपान की दुकानों के साथ ही ग्रामीणों से राज जानने की कोशिश करती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टीम वहां दस मिनट रुकी रही। हालांकि कोठी का दरवाजा बंद होने के कारण टीम लौट गई।
सीबीआई टीम कोतवाली भी पहुंची। पूर्व कोतवाल सर्वेश मिश्र की ओर से जीडी पर दर्ज तस्करे की छानबीन की। करीब आधे घंटे की पड़ताल के बाद टीम के सदस्य कुछ अभिलेख लेकर लौट गए।
सीबीआई टीम निलंबित कोतवाल सर्वेश मिश्रा से रोज पूछताछ कर रही है। मंगलवार को अमर उजाला ने जीडी में दर्ज तस्करे के हवाले से खुलासा किया कि खूनी खेल के दौरान राजा भैया के करीबी वहां मौजूद थे। कोतवाल के बयान के बाद रोजनामचा, जो तीन मार्च को कोतवाल ने लिखा था, उसका भी सीबीआई टीम ने अध्ययन किया।