सारनाथ में कंबोडियाई बौद्ध मंदिर का शुक्रवार को कंबोडिया की राजदूत यो मकाना ने फीता काटकर लोकार्पण किया। मंदिर में साढ़े चार फीट की धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है।
लोकार्पण समारोह के अंतिम दिन कंबोडिया के संघराजा भिक्षु एमलिम हेंग के नेतृत्व में पवित्र परित्रायण सूत्र पाठ संपन्न हुआ। इसके बाद मंदिर का सीमा बंधन हुआ।
जैसे ही पूजा समाप्त हुई, श्रद्धालुओं का हुजूम सीमा बंधन में लगे पवित्र सूत्र को पाने के लिए टूट पड़ा। सभी ने सूत्र को तोड़कर शुभ के लिए अपने पास रखा।
तीन दिनों से पूजे जा रहे नौ गोल पत्थर मंदिर परिसर के विभिन्न कोनों पर स्थापित किए गए। बौद्ध भिक्षुओं को दान दिए गए। मंदिर के प्रवक्ता भिक्षु धम्म पाल ने बताया कि सम्राट अशोक की बेटी संघमित्रा ने कंबोडिया में बौद्ध धर्म का विधिवत प्रचार-प्रसार किया था।
आज भी वहां की 95 प्रतिशत जनता बौद्ध मतावलंबी है। उन्होंने भारत और कंबोडिया के बीच मैत्री संबंधों को और मजबूत बनाने को मंदिर निर्माण का प्रमुख उद्देश्य बताया।
इस मौके पर कंबोडियन वास्तुकला के आधार पर मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया गया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए आरएएफ 102 बटालियन की एक कंपनी लगाई गई थी।
लोकार्पण समारोह में सारनाथ के सभी बौद्ध मंदिरों के प्रभारी और विहाराधिपति के अलावा एडीएम फाइनेंस कमला प्रसाद यादव भी उपस्थित रहे।