दो डिग्री गिरा पारा, ठंड से बेहाल हुए लोग
बुलंदशहर। मौसम में रोजाना उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद कोहरा और शीतलहर का सिलसिला जारी है। मंगलवार को दिनभर धूप नहीं निकली। इससे ठिठुरन बनी रही। दिन का अधिकतम तापमान भी दो डिग्री सेल्सियस गिर गया। मौसम वैज्ञानिक अभी इस माह के अंत तक कंपकंपा देने वाली ठंड से राहत नहीं मिलने की संभावना जता रहे हैं।
मंगलवार को अधिकतम तापमान 14 और न्यूनतम छह डिग्री सेल्सियस रहा। आद्रता 80 फीसदी और हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा रही। जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन की शुरूआत घने कोहरे से हुई। करीब 10 बजे तक चारों ओर घना कोहरा छाया रहा। इसके बाद कोहरा छंटा लेकिन शीतलहर जारी रही। धूप न निकलने और शीतलहर जारी रहने से मौसम काफी ठंडा बना रहा। शाम के समय अचानक फिर से ठंड बढ़ गई। सुबह से लेकर शाम तक सड़कों पर आवागमन कम दिखाई दिया। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने बताया कि बुधवार को अधिकतम तापमान 15 और न्यूनतम 7 डिग्री रहने की संभावना है। आद्रता 82 फीसदी और हवा की गति बढ़कर 15 किलोमीटर तक हो सकती है। ऐसे में अभी इस माह के अंत तक कंपकंपा देने वाली ठंड से राहत नहीं मिलने वाली।
गेहूं की फसल के लिए मौसम मुफीद, होगी बंपर पैदावार
बुलंदशहर। इस समय चल रहा मौसम गेहूं की फसल के लिए मुफीद बना हुआ है। इससे अगेती और पछेती गेहूं की फसल की फसल का उत्पाद बंपर होने की संभावना बन रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे भी मौसम ने साथ दिया तो जिले में इस बार गेहूं का रिकार्ड उत्पादन होगा। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि इस समय जिस तरह से ठंड पड़ रही है, वह गेहूं की फसल के लिए अनुकूल है। अगेती गेहूं की फसल का उत्पादन 50 से 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रहता है, लेकिन इस समय के मौसम को देखते हुए यह उत्पादन 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक होने की संभावना है। इसी तरह पछेती फसल का उत्पादन 40 से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। पछेती फसल का उत्पादन 45 क्विंटल से अधिक प्रति हेक्टेयर होने की भी संभावना है। यदि ऐसा होता है और फसल पकवार के समय बारिश और तेज हवा नहीं चली तो इस बार जिले में रिकार्ड गेहूं उत्पादन होगा।
आम में बौर आने से पहले कर दें दवा का छिड़काव
बुलंदशहर। जिला उद्यान अधिकारी एनके सहानिया ने बताया कि जनपद में 14 हजार हेक्टेयर भूमि में आम के बाग हैं। सबसे अधिक बाग स्याना क्षेत्र में हैं। इस क्षेत्र को फल पट्टी के नाम से भी जाना जाता है। इस समय मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर आम के पेड़ों में जल्द ही बौर आना शुरू हो जाएगा। मौसम में बदलाव को देखते हुए कीट लगने की संभावना बन रही है। ऐसे में इस समय बाग में सिंचाई करनी चाहिए, जिससे नमी बनी रहे। किसानों को इस समय पेड़ों पर कीटनाशक का छिड़काव भी कर देना चाहिए। इसके बाद दूसरा छिड़काव तब करना चाहिए जब बौर में लगे फल चने केे बराबर हो जाएं। बौर आने पर कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। इसका परागण हवा या मक्खियों द्वारा होता है। अगर कीटनाशक का छिड़काव कर दिया तो मक्ख्यिां मर जाएगी और बौर पर नमी होने के कारण परागण नहीं हो पाएगा। इससे फल कम आने की भी संभावना है। बागान किसान कीटनाशक दवा का प्रयोग करने के लिए विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।