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Bulandshahar News: आज एक हजार से अधिक जगह बजेगी शहनाई, वर-वधू लेंगे सात फेरे

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बुलंदशहर। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त में विवाह संस्कार शुभ माने जाते हैं। बुधवार को जिले में एक हजार से अधिक शादी-विवाह होंगे और शहनाई बजेगी। इस दिन प्यार का प्रतीक वेलेंटाइन डे भी है। ऐसे में सात फेरे लेकर संपन्न होने वाले विवाह वर-वधू के लिए यादगार भी बनेंगे।
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पंडित नरेश शर्मा के अनुसार इस बार वसंत पंचमी और वेलेंटाइन डे का संयोग बन रहा है। वसंत पंचमी को अबूझ साया माना जाता है, इसके कारण बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। वसंत पंचमी के दिन दोषरहित श्रेष्ठ योग बनते हैं, इसकी वजह से किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने को जरूरत नहीं होती है। शास्त्रों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के साथ कामदेव की भी पूजा अर्चना की जाती है और वसंत पंचमी का दिन शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम माना जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे ही शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण किया जा सकता है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में भी 400 से अधिक शादी होंगी। इसके लिए होटल, मैरिज होम और अन्य विवाह स्थल पहले ही बुक हो चुके हैं।
नुमाइश मैदान में होगा सामूहिक विवाह का आयोजन
बुधवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत विवाह का भव्य आयोजन होगा। नुमाइश मैदान में होने वाले समारोह में 688 जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। जिला प्रशासन की तरफ से नुमाइश मैदान में भव्य पंडाल लगाया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रचना शर्मा ने बताया कि योजना के तहत आवेदन करने वाले 72 जोड़ों का निकाह भी होगा।
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पीले वस्त्र पहनकर करें मां सरस्वती की पूजा
वसंद पंचमी के दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा शुभ होती है। ऐसी मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का अवतरण हुआ। पंडित अंकुश शर्मा क अनुसार बुधवार काे रेवती नक्षत्र, गज केसरी योग, शुक्ल योग, शुभ योग कुंभ राशि में और चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे। वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह 07:16 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक रहेगा। मां सरस्वती की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराकर पीले वस्त्र या पीली चुननी, गेंदे के फूल की माला से सजाया जाए। पीला चंदन और अक्षत से तिलक करें। मां सरस्वती की वंदन और मंत्र का पाठ करें। मां को पीले रंग की मिठाई, केसर वाले मीठे चावल, केला और लड्डू का भोग लगाए। साथ ही अंत में आरती करें।
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