जिले भर मे बिजली संकट गहरा गया है। जबरदस्त बिजली कटौती के कारण लोगों को पीने के पानी के भी लाले पड़ गए हैं। जिला मुख्यालय समेत कहीं भी पीक टाइम पर बिजली आपूर्ति नहीं हो रही है। लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर और बिजली उपकरण फुंक रहे हैं।
जिला मुख्यालय समेत किसी भी नगर और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आपूर्ति शेड्यूल के अनुसार नहीं की जा रही है। पीक टाइम के दौरान जबरदस्त बिजली कटौती की जा रही हैं। सबसे बुरा हाल तो ग्रामीण क्षेत्रों का है, जहां रात-रातभर बिजली कटौती की जा रही है।
लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने की संख्या में दोगुने से ज्यादा वृद्धि हो गई है। वहीं, गर्मी में बिजली की बढ़ती मांग के चलते ट्रांसमिशन पर डिमांड और आपूर्ति का अंतर बढ़ गया है। धरपा ट्रांसमिशन पर रविवार को जनपद की बिजली डिमांड करीब 900 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि इसके सापेक्ष आपूर्ति महज 600 मेगावाट ही की जा सकी।
शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति करने के लिए कारपोरेशन को रोजाना 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत है। बढ़ती बिजली कटौती से लोगों में आक्रोश को देखते हुए रोस्टरिंग के समय जेई और अधिकांश स्टाफ बिजलीघर छोड़ देता है। आपूर्ति के समय ही बिजलीघर पर स्टाफ की मौजूदगी रहती है।
ट्रांसफार्मरों की वेटिंग बढ़ी
गर्मी बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने की संख्या में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ट्रांसफार्मरों की वेटिंग भी काफी बढ़ गई है। सोमवार को बुलंदशहर स्टोर में 25 केवीए के ट्रांसफार्मरों की वेटिंग 65 थी, जबकि 63 केवीए के ट्रांसफार्मरों की वेटिंग 40 रही। इसके अलावा 100 केवीए के ट्रांसफार्मरों की वेटिंग संख्या 26 रही। जबकि रोजाना मात्र पांच से 10 ट्रांसफार्मर ही रोजाना उपभोक्ताओं को मिल पा रहे हैं।
पानी संकट भी गहराया
नगर पालिका द्वारा नगर क्षेत्र में पानी आपूर्ति के लिए 37 नलकूप संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकांश नलकूपों पर पालिका द्वारा जनरेटर से भी पानी आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन जबरदस्त बिजली कटौती ने पानी आपूर्ति को भी लड़खड़ा दिया है। सुबह और शाम के वक्त हो रही कटौती से नगर क्षेत्र में पानी की किल्लत भी बढ़ गई है।