बुलंदशहर। आजादी के आंदोलन में बुलंदशहर की धरती भी महात्मा गांधी के विचारों और स्वदेशी आंदोलन की गवाह बनी थी। तीन नवंबर 1929 को राष्ट्रपिता खादी के प्रचार-प्रसार के लिए बुलंदशहर पहुंचे थे। उन्होंने खुर्जा और सिकंदराबाद में भी लोगों को संबोधित कर स्वदेशी और खादी अपनाने का आह्वान किया था। गांधीजी के इस दौरे ने जिले के युवाओं में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति नई ऊर्जा और जोश भरने का काम किया।
रालोद के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके मास्टर मीर सिंह ने बताया कि उन्हें बुजुर्ग बताते थे कि महात्मा गांधी के बुलंदशहर आगमन के दौरान लाल तालाब में विशाल सभा का आयोजन किया गया था। गांधी को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग और विशेष रूप से युवा यहां पहुंचे थे।
सभा में गांधी ने देश की आजादी के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी को अपनाने का संदेश दिया।
उनके विचारों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में युवाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। महात्मा गांधी के इस दौरे के दौरान आजादी के आंदोलन के लिए लोगों ने आर्थिक सहयोग भी दिया था। इस दौरान उन्हें बुलंदशहर से चार हजार रुपये, सिकंदराबाद से 3600 रुपये और खुर्जा से 3600 रुपये की धनराशि गांधी को भेंट की गई थी।
उस दौर में यह राशि आंदोलन के लिए लोगों की प्रतिबद्धता और देश की आजादी के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती थी। महात्मा गांधी का यह दौरा केवल खादी के प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने जिले में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का भी काम किया। लाल तालाब में आयोजित सभा आज भी बुलंदशहर के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में याद की जाती है।