बुलंदशहर। जिला प्रदर्शनी मैदान की रविंद्र नाट्यशाला में शुक्रवार रात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।
इस दौरान वीर रस के कवि डॉ. हरिओम पंवार ने सरकार के पक्ष-विपक्ष और शहीदों के परिवारों की पीड़ा को लेकर कविताएं सुनाईं। वहीं, कवि डॉ. अर्जुन सिसोदिया, स्वयं श्रीवास्तव, सोनल जैन, चेतन चर्चित, शंभू शिखर, मणिकर्णिका दुबे समेत देश के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाओं पर प्रस्तुति दीं। जिसका शनिवार सुबह चार बजे समापन हुआ। डॉ. हरिओम पंवार ने देश जले मैं कुछ ना बोलूं मैं ऐसा गद्दार नहीं..कविता सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए ।
जिला प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में आयोजित हुए कवि सम्मेलन का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष विकास चौहान, प्रदर्शनी उपाध्यक्ष ठाकुर सुनील सिंह व समस्त कवियों ने किया। इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. हरिओम पंवार व संचालन मोहित शौर्य ने किया। मणिकर्णिका ने आरती की थाल सजाओ जी, वीणा पाणी मां को मनाओ जी.. सुना कार्यक्रम की शुरुआत की।
चेतन चर्चित ने बचपन में जब आशीर्वाद की जरूरत थी तो रिश्तेदार पैसे दे जाते थे, आज जब पैसे की जरूरत है तो आशीर्वाद दे जाते हैं.., लोकेश त्रिपाठी ने मर गई मां तो बट गए जेवर, बट गया घर पिता के मरते ही.., श्रद्धा शाैर्य ने वह स्वयं वीरता की गाथा पौरुष की नई निशानी थी, रानी मर्दानी क्यों होती जब रानी स्वयं भवानी थी.. व तूमने सारी शर्म बेच दी रील बनाने के खातिर.., सोनल जैन ने मोबाइल ने बदल दिए हैं जीवन के हालात,सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
स्वयं श्रीवास्तव ने ठहरी सिकंदरी का मुकद्दर नहीं मिला, दर छूट गया फिर कहीं भी दर नहीं मिला.., डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने वो देश की चिंता करते थे तुम जेब की चिंता करते हो, सुनाकर लोगों की तालियां बटोरी। इस दाैरान विधायक संजय शर्मा माैजूद रहे।
जिला प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में काव्यपाठ करते स्वयं श्रीवास्तव। संवाद
जिला प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में काव्यपाठ करते स्वयं श्रीवास्तव। संवाद