अनूपशहर में गंगा किनारे पितरों का तर्पण करते लोग। संवाद
अनूपशहर/अहार/डिबाई/नरौरा। जिले में रविवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या पर गंगा घाट आस्था से सराबोर रहे। पितरों की विदाई से पहले उनके अपनों ने आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद जलदान के साथ तर्पण कर उन्हें विदा किया। गंगा घाटों पर हर-हर गंगे का जयकारे गूंजते रहे।
जिले भर के गंगा घाटों पर गंगा स्नान रविवार तड़के से ही शुरू हो गया। जिले के अलावा आसपास इलाके से घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। जलदान कर पितरों को विदा करते समय श्रद्धालुओं ने पुरोहितों से धार्मिक विधान के अनुरूप पूजन कराया।
अमावस्या पर जलदान के साथ ही पृथ्वी लोक से पितरों की विदाई हो जाती है। वहीं, गंगा किनारे घाटों पर काफी भीड़भाड़ रही। अधिकतर श्रद्धालु निजी वाहनों से पहुंचे। अनूपशहर में भी बबस्टर गंज घाट, बाबा मस्तराम घाट, गंगा पुल और कच्चे घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। श्रद्धालुओं का आगमन शनिवार की देर शाम से ही शुरू हो गया था।
स्नान के बाद लोगों ने पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 50 पुलिसकर्मियों को विभिन्न घाटों पर तैनात किया गया। सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध पक्ष का समापन होता है। इसे पितृ अमावस्या, महालया अमावस्या और पितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन विशेष महत्व है। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका श्राद्ध पहले नहीं किया जा सका। इसी तरह अहार क्षेत्र में सिद्ध बाबा गंगा घाट और अवंतिका देवी घाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी।
अनूपशहर में गंगा किनारे पितरों का तर्पण करते लोग। संवाद