हालात में सुधार नहीं हुआ तो जनपद में गेहूं खरीद सरकारी मशीनरी की लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है। दरअसल, शुक्रवार से जनपद में गेहूं की खरीद शुरू होनी थी। खरीदारी को लेकर मार्केटिंग अफसरों ने बड़े-बड़े दावे जरूर किए, लेकिन पहले ही दिन सब दावे धराशायी हो गए। जनपद में क्रय केंद्रों की स्थापना सिर्फ कागजों में ही की गई हैं।
अनाज मंडी में एक केंद्र को खुला दिखाने की मंशा से पिछले वर्ष का गेहूं का रेट लिख दिया गया। पिछले साल 1450 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा गया। जबकि, इस साल गेहूं का समर्थन मूल्य 1525 रुपये क्विंटल तय किया गया है।