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ट्रांसफार्मर की मरम्मत में बड़ा खेल, करीब आठ करोड़ का हुआ फर्जीवाड़ा

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ट्रांसफार्मर की मरम्मत में बड़ा खेल, करीब आठ करोड़ का हुआ फर्जीवाड़ा
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बुलंदशहर। बिजली निगम में ट्रांसफार्मर की मरम्मत में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गांव-कस्बों में लगे बिजली निगम के ट्रांसफार्मरों के फुंकने की फर्जी शिकायत कराकर उसके बदले निजी कंपनियों के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत हो रही थी।प्रदेश में ट्रांसफार्मर मरम्मत के मामले में जिला पहले स्थान पर पहुंचा तो लखनऊ में बैठे अधिकारियों को इस पर शक हुआ। इसके बाद कराई गई जांच में यह मामला पकड़ा गया है। बिजली निगम के अनुमान के मुताबिक एक साल में करीब आठ करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है।
जांच में पता चला कि शहर की कालोनियों, कस्बों और गांवों में लगे बड़े ट्रांसफार्मरों के फुंकने की फर्जी शिकायत दर्ज कराने के बाद निजी कंपनियों में लगे खराब ट्रांसफार्मरों को उतारकर शिकायत वाले ट्रांसफार्मर के स्थान पर पहुंचाया जाता था। वहां से कर्मचारी निजी कंपनी के ट्रांसफार्मर को वर्कशॉप लाते थे। ऐसे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का बिल तो बिजली निगम के नाम पर चढ़ाया जाता था, लेकिन मरम्मत करने के बाद संबंधित कंपनी से निजी तौर पर बिल वसूली की कर ली जाती थी। प्रतिमाह 60 केवीए से अधिक के लगभग 450 ट्रांसफार्मर की मरम्मत की गई। इसके बाद ट्रांसफार्मर मरम्मत के मामले में बुलंदशहर प्रदेश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। शक होने पर चेयरमैन एम. देवराज ने चीफ इंजीनियर को जांच के निर्देश दिए।
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चीफ इंजीनियर ने टीम के साथ वर्कशॉप में पहुंचकर जांच की तो सारा काला चिट्ठा खुलकर सामने आया। पता लगा कि जिस क्षेत्र से ट्रांसफार्मर फुंकने की शिकायत दर्ज कराई गई, वहां काफी समय से ऐसी समस्या आई ही नहीं। बिजली निगम की जिस गाड़ी से ट्रांसफार्मर लाए जा रहे थे, पहले उसे शिकायत वाले स्थान पर पहुंचाया जाता था। इसके बाद किसी अन्य स्थान पर दो घंटे तक खड़ा रखा जाता था। फिर वह ट्रांसफार्मर लेकर वर्कशॉप आती थी।
गाड़ियों के जीपीएस गायब, नहीं की जा रही ट्रेसिंग
खराब ट्रांसफार्मरों को लाने व ले जाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य है। इसके बाद भी आधे से अधिक वाहनों के जीपीएस लंबे समय से खराब पड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़े में उन्हीं वाहनों का प्रयोग किया जाता था, जिनका जीपीएस सिस्टम खराब पड़ा था।
जांच के बाद कम हुआ ट्रांसफार्मर मरम्मत का आंकड़ा
बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा खुलने के बाद अब 60 केवीए से अधिक के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का आंकड़ा कम हो गया है। वर्तमान में प्रतिमाह करीब 50-60 ट्रांसफार्मर ही खराब हो रहे हैं। इसके अलावा 15-25 केवीए के 300 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं।
20 हजार से दो लाख आता है खर्च
एसडीओ वर्कशॉप शुभम त्यागी ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर को ठीक करने में 20 हजार रुपये से दो लाखे रुपये तक का खर्च आता है। जैसे ट्रांसफार्मर बड़ा होता चला जाएगा, उसके ठीक करने की कीमत भी बढ़ती चली जाएगी।
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मेरे चार्ज लेने से पहले ट्रांसफार्मर फुंकने की संख्या बहुत ज्यादा थी। उच्च अधिकारियों से जांच करने के निर्देश मिले थे। जांच में कुछ चीजें गलत मिली हैं। रिपोर्ट तैयार करके भेजी जा रही है। जो भी संलिप्त पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विनोद कुमार मिश्र, चीफ इंजीनियर, बिजली निगम
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