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रनवीर की पत्नी,बेटी और बेटे के खिलाफ वारंट जारी

Fri, 22 Jul 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
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बरारी नरसंहार - फोटो : ब्यूरो
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बरारी नरसंहार मामले में भले ही रनवीर की पत्नी देवेंद्री बच गई हो, लेकिन क्रिकेटर भुवनेश्वर के पिता से ठगी के मामले में पूरी परिवार मेरठ पुलिस ने शिकंजे में फंस गया है। मेरठ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। कोर्ट ने रनवीर के पुत्र अरविंद, पत्नी देवेंद्री और बेटी लवली के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं।
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फिलहाल तीनों फरार हैं। मेरठ पुलिस ने तीनों के खिलाफ कुर्की की कार्यवाही के लिए भी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे दिया है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल लवली को अफसरों ने सस्पेंड कर दिया है।

करीब एक साल पहले बुलंदशहर जेल में बंद बरारी नरसंहार के दोषी रनवीर ने क्रिकेटर भुवनेश्वर के पिता रिटायर्ड दरोगा किरनपाल को 40 बीघे जमीन बेचने का सौदा किया था। भुवी के पिता किरनपाल ने आरटीजीएस के तहत रनवीर के खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे।
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लेकिन रनवीर बैनामा के समय मुकर गया। उसने बैनामा करने और रुपये वापस करने से इनकार कर दिया था। अक्टूबर 2015 में मेरठ के इंचौली थाने में रनवीर, पत्नी देवेंद्री, बेटा अरविंद और बेटी लवली के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद रनवीर ने भुवी के पिता को जेल से धमकी भी दी थी। इसके बाद जनवरी माह में शासन के आदेश पर रनवीर को जिला कारागार से महाराजगंज जेल भेज दिया था। मामले की जांच इंचौली थाने से गंगानगर थाने में ट्रांसफर हो गई।

गंगानगर एसओ एपी सिंह ने बताया कि क्राइम नंबर 449/15 की विवेचना पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है। रनवीर के पुत्र अरविंद, पत्नी देवेंद्री और बेटी लवली के खिलाफ गैर जमानती वारंट कोर्ट ने जारी कर दिए हैं।

उन्होंने बताया कि रनवीर की बेटी लवली दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात है। करीब डेढ़ माह पहले वह एक माह की छुट्टी लेकर गई थी, लेकिन तब से नहीं लौटी। इस पर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने लवली को सस्पेंड कर दिया।

एपी सिंह ने बताया कि विवेचक ने सीआरपीसी की धारा 82 की कार्यवाही के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद कुर्की का नोटिस चस्पा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीनों फरारी काट रहे हैं।

इससे अच्छा तो रनवीर मर ही जाता: मनवीर सिंह
किसने देखी जन्नत, कहां है वो जन्नत आज, रनवीर की क्या जिंदगी है, कल का हाल देखा था। कितने पुलिस के घेरे में जब वो अपनों के बीच निकल रहे थे न बीवी, न लड़का, न लड़की कोई भी साथ नहीं था। आज उसकी क्या जिंदगी है। इससे तो तू मर ही गया होता।

मुझे भी कोई नहीं रोक रहा था, मुझे तो कभी किसी ने रोका नहीं था, मुझे जब कटघरे में खड़ा करते थे, तो जब पता चलता था कि ये भी मुल्जिम है। जब उसमें अन्दर हो जाता था तो लोग कहते थे कि यह मुल्जिम नहीं है। जब पेशगार कहते हैं कि आप वकील हैं तो फिर मैं कहता था कि मैं वकील नहीं हूं।

इतनी बदतर जिंदगी बिताई है कि मैं कुछ कह नहीं सकता हूं। मैंने ही सारी घटना पुलिस को बताई थी। शुरुआत से लेकर अंत तक सारे सारे खुलासे मैंने ही किए थे, लेकिन यह दुर्भाग्य था कि मुझे भी दोषी बना दिया गया। कोई भी ऐसा आधार और तथ्य नहीं मिल सका, जो मुझे इस कांड में मुल्जिम साबित कर सके।

आज मैं दोषमुक्त हूं। दो साल 19 दिन मुझे जेल में रहना पड़ा था। यह कहना है मृतक सुखवीर सिंह और दोषी साबित किए गए रनवीर सिंह के सबसे छोटे भाई मास्टर संजीव कुमार उर्फ मनवीर सिंह का। मनवीर सिंह वर्तमान में मोदीनगर में रह रहे हैं, जबकि वह एक इंटर कॉलेज में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

आज महाराजगंज  पहुंचेगा रनवीर
महाराजगंज जेल के अधीक्षक अनिल कुमार रॉय ने बताया कि करीब छह माह से रनवीर महाराजगंज जेल में बंद है। वह आम कैदियों की तरह बैरक में रहता है। उन्होंने कहा कि रनवीर को फांसी की सजा की जानकारी मिली है।

शनिवार को रनवीर के महाराजगंज पहुंचने की संभावना है। जेल अधीक्षक ने कहा कि उनकी जेल में अंकित गुर्जर, मुकीम काला जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश केे शातिर अपराधी बंद हैं।

मासूम चीकू को जन्मदिन पर मिली थी मौत
औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव बरारी में सुखवीर के परिवार में एक नया मेहमान दुनिया में आने वाला था। जिसकी किलकारियों से उसका आंगन गूंजने वाला था। सुखवीर के मासूम पौते चीकू को इसी दिन पड़ने वाले अपने दूसरे जन्मदिन पर तोहफे मिलने थे। सुखवीर के आंगन में उस समय किलकारियां तो नहीं गूंज सकीं, लेकिन वहां मासूम चीकू  के जन्मदिन पर उसके मौत जरूर मिली।
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