बसों में सीट नहीं, बहनों को झेलनी पड़ी दुश्वारियां
बुलंदशहर। रक्षाबंधन पर रोडवेज की बसें यात्रियों से भरी रहीं। यात्रियों को राहत देने के लिए चलाई गई अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। वहीं, बसों में सीट पाने के लिए यात्रियों में सुबह से शाम तक आपाधापी मची रही। ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसों की सेवा न मिलने पर यात्रियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, जान जोखिम में डालकर भी यात्रा करनी पड़ी। वहीं, महिलाओं को निशुल्क यात्रा का भी कम लाभ मिल सका।
रक्षाबंधन पर सुबह से ही लोगों की भीड़ बस अड्डों पर नजर आई। पिछले कई दिनों से यात्रियों की कमी से जूझ रहे रोडवेज ने लगातार दूसरे दिन रविवार को भी राहत की सांस ली। त्योहार के कारण रोडवेज के यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। महिलाओं को जहां निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई, लेकिन बसों की संख्या कम होने और यात्रियों की संख्या अधिक होने पर लाभ नहीं मिल सका। सुबह से शाम तक रोडवेज की बसें यात्रियों से भरी रहीं। यात्रियों की संख्या को देखते हुए बुलंदशहर डिपो से करीब 72 बसें चलाई गईं। जिसके चलते पूरे दिन यात्रियों की बसों के परिचालकों और चालकों से स्टॉप पर बस न रोकने के लिए नोंकझोंक और झड़पें होती रहीं।
चौराहों पर किया घंटों इंतजार
नगर के पुराने बस अड्डे और नए बस अड्डे पर यात्रियों ने सुबह से शाम तक रोडवेज बसों का इंतजार किया। संबंधित मार्ग के लिए रोडवेज बस न मिलने पर चौराहों पर पहुंचे। यहां भी यात्रियों की बसों की कमी के चलते काफी समय तक खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। हालात यह रहे कि जो भी बस आती वो तुरंत फुल हो जाती। बस फुल होने पर महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रोडवेज की लेटलतीफी से डग्गामार की चांदी
जिले से विभिन्न मार्गों पर बड़े पैमाने पर मैजिक वाहन और चार पहिया वाहनों का संचालन किया जाता है। रविवार को रोडवेज बसों की लेटलतीफी का फायदा इन डग्गामार वाहन संचालकों ने जमकर उठाया। सवारियों को वाहनों में भूसे की तरह ठूंसने के बाद उनसे जमकर मनमाना किराया वसूला गया।
रक्षाबंधन पर बहनें और महिलाओं को निशुल्क यात्रा के लिए व्यवस्थाएं की गई। यात्रियों की भीड़ और बसों की कमी से कुछ व्यवधान पैदा हुआ। उन्हें काफी हद तक दूर भी किया गया। प्रयास रहा कि रोडवेज बस अड्डे आने वाले सभी यात्रियों को गंतव्य तक छोड़ा जाए।
- धीरज सिंह पंवार, एआरएम