23 दिन के बच्चे को रेफर करने के बाद अस्पताल ने चेक से भुगतान नहीं लिया तो मासूम को इलाज के लिए दिल्ली ले जाने में चार दिन की देर हो गई। तीन दिन बाद इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई तो परिजनों ने बच्चे को रेफर करने वाले डॉक्टर पर इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए नगर कोतवाली में तहरीर दी।
वहीं पुलिस ने सीएमओ की जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने की बात कह रही है। जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव शिवाली निवासी प्रीति को 12 नवंबर को गांव में ही बेटा पैदा हुआ था। प्रीति का पति संजय नोएडा में प्राइवेट नौकरी करता है। डिलीवरी प्रीमेच्योर थी लिहाजा 13 नवंबर बच्चे को डीएम रोड स्थित एक निजी अस्पताल लाकर भर्ती करा दिया गया।
आरोप है कि 28 नवंबर को डॉक्टर ने बच्चे को दिल्ली ले जाने को कहा तो परिजन अस्पताल का भुगतान करने लगे। आरोप है कि भुगतान के वक्त उनसे नई करेंसी मांगी गई। उन्होंने चेक दिया तो लेने से इनकार कर दिया गया। बाद में पुरानी करेंसी को 20 फीसदी कम पर लेने को कहा गया।
अस्पताल का बिल चुकाने की इसी जद्दोजहद में चार दिन गुजर गए। बाद में डॉक्टर ने चेक ले लिया और दो दिसंबर को बच्वे को दिल्ली रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान 5 दिसंबर को बच्चे की मौत हो गई।
इस पर प्रीति के रिश्तेदार विनय ने बृहस्पतिवार को डॉक्टर के खिलाफ इलाज और रेफर करने में देरी का आरोप लगाते हुए नगर कोतवाली में तहरीर दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डॉक्टर के बयान दर्ज किए गए हैं। समाचार लिखे जाने तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
डॉक्टर ने किया आरोपों से इनकार
इलाज करने वाले चिकित्सक का कहना है कि उनके उपर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने नए नोट लेने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया। बल्कि शिकायत पक्ष द्वारा उन्हें चेक दिया गया, जो उनके पास सुरक्षित है। बच्चे की हालत गंभीर थी। गंभीर हालत को देखते हुए उसे रेफर कर दिया गया, जिसके बाद ही बच्चे ने दम तोड़ा। वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
साहब! बच्चा बीमार है, पैसे दे दो
‘साहब बच्चा बीमार है। रुपये दे दो।’ बीमार बच्चे का उपचार कराने के लिए बैंक के चक्कर लगा रही महिला बार-बार यही कह रही थी मगर कैश नहीं होने के कारण महिला को बैंक से मायूसी के अलावा कुछ नहीं मिल सका। नगर के गंज बाजार निवासी पूनम पत्नी विशेष कुमार सिंघल ने बताया कि उसका चार वर्षीय बेटा माधव पिछले कई दिनों से बीमार है।
उनका नगर के सहकारी बैंक में खाता है। बीमार बच्चे का उपचार कराने के लिए पिछले चार दिन से वह बैंक से रुपये निकालने के लिए बैंक के चक्कर लगा रही है। बृहस्पतिवार को भी घंटों लाइन में लगने के बाद वह मायूस होकर लौट गई। बैंक मैनेजर प्रकाश नंद का कहना है कि 15 नवंबर के बाद से बैंक में कैश नहीं आया। इधर-उधर से व्यवस्था कर थोड़ा, थोड़ा कैश बांट रहे है।
पूरा मामला चिकित्सा से जुड़ा हुआ है। इसमें पहले सीएमओ स्तर से रिपोर्ट मांगी जाएगी। तहरीर के संबंध में सीएमओ को पत्र लिखा गया है। सीएमओ की जांच के बाद उनके निर्देश के बाद ही चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। -पोषीराम शर्मा, प्रभारी, नगर कोतवाली
यदि ऐसा कोई मामला है तो यह गंभीर है। अभी तक मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने के बाद ही मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ